लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने कजरी गीत के जरिए देश में हिंदू-मुसलमान पर हो रही नरफत पर निशाना साधा है। उन्होंने बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी घेरा है। इसमें रोजी- रोजगार का सवाल है, समाज का टूट रहा ताना-बाना है, महंगाई है, रुपये के गिरते भाव हैं और मीडिया पर सवाल के साथ सिस्टम पर हल्ला बोल है।

नेहा सिंह राठौर।
कजरी के जरिए नेता, सिस्टम से लेकर मीडिया पर तंज
बिहार की बेटी नेहा सिंह राठौर की शादी हाल में ही यूपी में हुई है। नए गीत में नेहा ने गाया है- ‘सावन में बहे लहुअन के धार, लगे कजरी बेकार राजा जी, एहिजा हिंदू-मुसलमान मचल बाटे घमासान… केहू के गर्दन केहू के तलवार लगे कजरी बेकार राजा जी.. साहेब करे ल ऐलान.. विश्व गुरु हिंदुस्तान… इ त बोलें लें झूठ हजार.. लगे कजरी बेकार राजा जी… बीतल आधा उमरिया…दौड़त धेह भइल करिया… तबो मिलल न रोजी रोजगार … कजरी बेकार राजा जी…
गिरल रुपया के दाम देश भइल बदनाम, पूरे दुनिया में देश बइल बदनाम…. कजरी बेकार राजा जी… मीडिया उन्हीं के बोल बोले.. हां साहेब के बोल बोलें… गुणगावै दरबारी कलाकार … कजरी बेकार राजा जी…. सावन में बरसे लहुअन के धार… लागे कजरी बेकार राजा जी।’ नेहा सिंह राठौर पॉलिटिकल सटायर में ताने मारती है। वह टोन इस नए कजरी गीत में है।

नेहा सिंह राठौर।
तेज बारिश के बीच कजरी गाने की परंपरा
कजरी, मानसून के समय घनघोर बारिश के समय गायी जाती है। आनंद के माहौल के बीच यह गाई जाती है। परंपरागत कजरी में मेहदी, झूलों की बात होती है। नई चीजें जो समाज में आती है उसका जिक्र इसमें होता है। बनारस की वह कजरी प्रसिद्ध रही है जिसमें गाया जाता है- ‘ जाके मेंहदी लेके आवा.. छोटी ननद से पिसवाबा… अरे हमरे हाथ में लगवावअ कांटा- कील से.. पिया मेंहदी ले आवा मोती झील से… जा के साइकिल से न… जा के साइकिल से….पकड़ लेई बागवान… सजा होई जो चलान… सजा होई जो चलान… सजा होई जो चलान… तो के लड़के छोड़ाइब वकील से.. जा के साइकिल से ना…. पिया मेहदी ले आवा मोती झील से… सेवक इतने कहानी जबले रही जिनगानी….बाक करे मत कोई से… बेशील से … जा के साइसिल से….मोटर साइकिल से ना…।



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