पहले तो अप्रैल के महीने से ही रिकॉर्डतोड़ गर्मी और लू ने हैरान कर दिया था, वहीं पिछले कुछ समय से पूर्वोत्तर का इलाका बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है. असम में विनाशकारी बाढ़ लाखों लोगों को बेघर कर चुकी है. अब मुंबई में बारिश कहर बनकर टूट रही है. मौसम का मिजाज सिर्फ भारत में ही बिगड़ा हुआ नहीं है, अमेरिका, यूरोप से लेकर ऑस्ट्रेलिया और चीन से लेकर जापान तक मौसम की मार झेल रहे हैं. कहीं भीषण गर्मी और सूखे ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है तो कहीं बाढ़ ने नींद उड़ा रखी है. इटली की तो सबसे लंबी नदी सूखे की मार झेल रही है, जिससे 30 फीसदी तक फसल चौपट होने का खतरा पैदा हो गया है.
यूरोप जबर्दस्त गर्मी से बेहाल
यूरोप में जून के महीने में जबर्दस्त गर्मी पड़ी. आर्कटिक सर्कल से लेकर उत्तरी अफ्रीका तक गर्मी ने कई रिकार्ड झुलस गए. कई देशों में तापमान 20 डिग्री तक बढ़ गया. बीबीसी के मुताबिक, नॉर्वे में हाल ही में 32.5 डिग्री सेल्सियस तापमान था, जो यूरोप में पूरे आर्कटिक सर्कल में सबसे ज्यादा था. पोलैंड में टेंपरेचर 35 डिग्री के करीब पहुंच गया. पूर्वी जर्मनी में पारे ने 37 डिग्री का स्तर छू लिया. स्लोवेनिया, क्रोएशिया, बोस्निया आदि में गर्मी ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए.
अमेरिका में रिकॉर्डतोड़ गर्मी
अमेरिका में भी गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. जून में 10 करोड़ से ज्यादा अमेरिकियों के लिए चेतावनी जारी की गई थी कि वे घर से बाहर न निकलें. सेंट लुइस, मेम्फिस, मिनोपोलिस और टुलसा जैसे कई शहरों में पारे ने 38 डिग्री सेल्सियस का स्तर पार कर लिया था. जैकसन, मिसीसिपी जैस शहर 35 डिग्री पर तप रह थे. साउथ कैलिफॉर्निया में भी पारा 38 डिग्री तक हो गया था. इसकी वजह से लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ा था.
ऑस्ट्रेलिया में बाढ़ ने बढ़ाई परेशानी
ऑस्ट्रेलिया में बाढ़ ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है. जुलाई शुरु होने के बाद से न्यू साउथ वेल्स में 900 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हो चुकी है. ये कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि लंदन में पूरे साल में इतनी बारिश नहीं हुई. सिडनी का हाल ये है कि 50 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजना पड़ा है. देश के सबसे बड़े शहर में इस साल तीसरी बार बाढ़ ने कहर बरपाया है. विनाशकारी बाढ़ में अब तक 20 से ज्यादा लोगों की जिंदगियां जा चुकी हैं.
जापान में पारे ने किया बीमार
यूरोप ही नहीं, जापान भी इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है. तोक्यो में तो शनिवार को गर्मी का ये हाल हो गया कि 1875 में जब से मौसम का रिकॉर्ड रखा जाना शुरु हुआ है, तब से इतनी गर्मी नहीं पड़ी. गर्मी की वजह से लोग बीमार पड़ रहे हैं. हाल के दिनों में 4500 से ज्यादा लोगों को हीट स्ट्रोक के लक्षणों के चलते अस्पताल पहुंचना पड़ा. इनमें ज्यादातर बुजुर्ग हैं. अधिकारियों की तरफ से लोगों से कम से कम एक हफ्ते तक बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलने को कहा गया है. गर्मी की वजह से एसी को ऊंचे तापमान पर चलाया जा रहा है, जो गर्मी को और बढ़ा रहा हैं.
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इटली सूखे की मार से बेहाल
इटली सूखे की मार से बेहाल है. यहां 70 साल का सबसे भयानक सूखा पड़ रहा है. हालत ये है कि देश के 5 उत्तरी इलाकों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है. सूखे की वजह से इटली की 30 फीसदी फसल बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है. इटली की सबसे लंबी नदी पो में पानी कम हो गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस नदी में 85 फीसदी तक पानी घट गया है. इसकी वजह से आसपास के इलाकों में फसलें खराब हो रही हैं. पो नदी इटली के उन इलाकों से होकर गुजरती है, जहां एक तिहाई फसलें पैदा होती हैं. इस सूखे की मुख्य वजह बेहद ज्यादा तापमान और बारिश की कमी बताई जा रही है. एक्सपर्ट्स को आशंका है कि जल्द ही बारिश नहीं हुई तो हालात और भी खराब हो सकते हैं.
जलवायु परिवर्तन है इसकी वजह
वैज्ञानिकों का मानना है कि मौसम के मिजाज में इस बदलाव की मुख्य वजह जलवायु परिवर्तन है. इसी की वजह से कहीं निचोड़ देने वाली गर्मी पड़ रही है तो कहीं मूसलाधार बारिश ने जीना मुहाल कर दिया है. पिछले तीन महीनों में मानसूनी बारिश ने दक्षिण एशिया के कई हिस्सों, भारत, बांग्लादेश आदि में विनाशकारी बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है. पिछले हफ्ते चीन में भारी बारिश की वजह से बाढ़ आ गई थी. वहीं, पूर्वी अफ्रीका में सूखे की वजह से लाखों लोगों के सामने खाने-पीने की चीजों का संकट मंडराने लगा है. एनवायरनमेंटल रिसर्च में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले जहां हीटवेव की 10 में से 1 चांस होते थे, अब ये तीन गुना बढ़ गए हैं






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