बगहा के करमाहा बोधसर में आज भी ग्रामीण चचरी पुल के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। लौकरिया थाना क्षेत्र के करमाहा बोधसर गांव से होकर गुजरने वाली झिकैरी नदी पर चचरी पुल ही ग्रामीणों का सहारा है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ में चार से पांच बार चचरी पूल बहता है और ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर पुल बनाते हैं लेकिन 20 वर्षों से कोई भी जनप्रतिनिधि इस पर पक्का पूल का निर्माण नही करवाता और चुनाव के समय महज दिलासा देते हैं।

गांव तक जाने का है रास्ता
लोगों ने बताया कि बोधसर गांव से बिनवलिया, नारायणगढ़ व हरनाटांड़ को जोड़ने वाले इस रास्ते पर अब तक पक्का पूल नही बन पाया है। ग्रामीण वर्षों से मांग करते आ रहे हैं कि इस पहाड़ी नदी पर एक पूल बनवा दिया जाए ताकि उनको अपने खेतों समेत दर्जनों गांवों में आवागमन सुलभ हो सके लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता आया है।
प्रत्येक वर्ष 4 से 5 बार बार जाता है पुल
ग्रामीण बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष बाढ़ में उन्हें चार से पांच मर्तबा चचरी पुल बनवाना पड़ता है। क्योंकि जब भी पहाड़ी नदी उफनाती है तो उनके द्वारा बनाये गए चचरी पूल को बहा ले जाती है। जिसके बाद ग्रामीण चंदा इकट्ठा करते हैं और फिर श्रमदान से पूल बनाते हैं। इस आदिवासी बहुल इस इलाके के अधिकांश लोगों की खेती झिकैरी नदी के पार है लिहाजा उन्हें प्रतिदिन पुल पार कर जाना ही पड़ता है ऐसे में बाढ़ के सीजन में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।






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