गाैरवशाली अतीत की नींव पर नई पीढ़ी के निर्माण के लिए नित्य नया आयाम गढ़ रहा एलएस काॅलेज रविवार काे 122 वर्ष पूरे कर लेगा। इस दिन 123वां स्थापना दिवस मनेगा। सरकार ने एलएस काॅलेज काे 2012 में हेरिटेज स्टेटस दिया। पांच शिक्षकों और 72 छात्राें के साथ 3 जुलाई 1899 काे खुला यह काॅलेज मोहनदास करमचंद गांधी के चंपारण सत्याग्रह और कई अन्य स्मृतियों काे सहेजे है।
अब भी काॅलेज कैंपस में वह गांधी कूप कायम है, जिसका पानी महात्मा गांधी ने पीया। उसी कुएं पर स्नान किया। यह काॅलेज बीआरए बिहार विवि में नैक से ए ग्रेडेड एकमात्र काॅलेज है। देश की आजादी के पहले से अब अब तक एलएस काॅलेज उत्तर बिहार के छात्राें की पहली पसंद है। मुख्य संरक्षक और बिहार रत्न लंगट सिंह के नेतृत्व में शुरू हुए संस्थान पर मुजफ्फरपुर काे गर्व है कि देश की कई विभूतियां इस कॉलेज से जुड़ी रहीं।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद यहां प्राध्यापक थे, जो देश के प्रथम राष्ट्रपति बने। आचार्य जेबी कृपलानी (बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने) और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर भी यहां पढ़ाते थे। गोवा की राज्यपाल रहीं डॉ. मृदुला सिन्हा ने एलएस कॉलेज से ही पढ़ाई की थी।
जानिए काॅलेज से निकलीं हस्तियाें को, जिन्होंने कायम की मिसाल
- स्वतंत्रता सेनानी प्राे. एमआर मलकानी।
- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर।
- पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. जगन्नाथ मिश्र।
- भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी डाॅ. भृगुनाथ सिंह।
- पटना विवि के पूर्व वीसी डाॅ. सुदर्शन प्रसाद सिंह।
- पटना विवि के पूर्व वीसी आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा।
- पद्म श्री डाॅ. श्यामनंदन किशोर।
- भारतीय इतिहास कांग्रेस अध्यक्ष डाॅ. हरिरंजन घोषाल।
- प्रतिभाशाली छात्र जिन पर सभी काे है नाज
पूर्व वीसी एवं नेपाल-जापान में राजदूत रहे चंद्रेश्वर प्रसाद नारायण सिन्हा, पूर्व संसदीय कार्य मंत्री सत्यनारायण सिन्हा, पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शुकदेव प्रसाद वर्मा ,बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विंध्येश्वरी प्रसाद वर्मा ,पश्चिम बंगाल के मंत्री रहे ईश्वरी प्रसाद जालान, पूर्व विदेश मंत्री श्यामनंदन मिश्र , बीआरएबीयू, मुजफ्फरपुर के प्रथम वीसी श्यामनंदन सहाय, पूर्व मंत्री दीपनारायण सिंह, पूर्व मंत्री वीरचंद पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री ललितेश्वर प्रसाद शाही, पूर्व केंद्रीय मंत्री डाॅ. रघुवंश प्रसाद सिंह, पूर्व शिक्षा मंत्री ठाकुर प्रसाद सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री डाॅ. रामकृपाल सिंह, पूर्व मंत्री डाॅ. रामचंद्र पूर्वे, पूर्व मंत्री नलिनी रंजन सिन्हा, पूर्व मंत्री रामजीवन सिंह, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष जाबिर हुसैन, पूर्व डीजी पुलिस गदाधर नारायण सिंह, पूर्व न्यायाधीश मनोरंजन प्रसाद, पूर्व आईजी डीपी आझा, लोकप्रिय गायिका शारदा सिन्हा, कवि व गद्य शिल्पी रामइकबाल सिंह राकेश, मत्स्य वैज्ञानिक डाॅ. दिलीप कुमार, आईपीएस आमाेद कंठ, अमिताभ कुमार, वीवी लाल, विपिन बिहारी लाल आदि।

आज विधानसभा अध्यक्ष करेंगे कंप्यूटर सेंटर और दिनकर पार्क का उद्घाटन
एलएस काॅलेज के 123वें स्थापना दिवस काे लेकर काॅलेज कैंपस सज-धज कर तैयार है। एक दर्जन से अधिक पार्कों एवं भवन काे रंग-बिरंगी लाइटों से राेशन किया गया है। साफ-सफाई के साथ गांधी कूप के समीप गांधी पार्क में रंगीन फव्वारे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रविवार काे विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा स्थापना दिवस समारोह में शामिल हाेंगे। वे 100 छात्रों के लिए बने आधुनिक कंप्यूटर सेंटर व दिनकर पार्क का उद्घाटन करेंगे।
प्राचार्य डाॅ. ओपी राय ने कहा कि समारोह में श्रम संसाधन मंत्री जीवेश कुमार, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद, कुलपति डाॅ. हनुमान प्रसाद पाण्डेय सहित कई शिक्षाविद् शामिल हाेंगे। शनिवार काे प्राचार्य ने शिक्षकों के साथ बैठक की और समारोह की तैयारी की समीक्षा की। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हाेगा। बैठक में प्रो. टीके डे, प्रो. राजीव कुमार, प्रो. अशोक अंशुमान, प्रो. पीयूष वर्मा, प्रो. जयकांत सिंह, प्रो. राजीव झा, प्रो. संगीता अग्रवाल, डाॅ. पंकज कुमार आदि मौजूद थे।
लंगट सिंह कॉलेज 123वां स्थापना दिवस
- 03 जुलाई 1899 काे हुई थी शुरुआत
- 05 शिक्षक और 72 छात्र थे उस वक्त
- 59 एकड़ में फैला है पूरा काॅलेज परिसर
- 10 एकड़ क्षेत्र में हैं
- 95 क्लासरूम
- 63 फैकल्टी व 6300 स्टूडेंट्स हैं अभी
- 1.01 हजार पुस्तकें हैं
- 798 जर्नल हैं काॅलेज पुस्तकालय में
- 2012 में काॅलेज काे मिला हेरिटेज स्टेटस
इनसे गौरवान्वित है एलएस कॉलेज
- डाॅ. राजेंद्र प्रसाद- देश के प्रथम राष्ट्रपति यहां प्राध्यापक रहे।
- महात्मा गांधी- चंपारण सत्याग्रह का बीज यहीं बाेया
- आचार्य कृपलानी- राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष भी प्राध्यापक रहे
- रामधारी सिंह दिनकर- राष्ट्रकवि की कर्मभूमि रहा एलएस काॅलेज
- 1917 में मोहनदास करमचंद गांधी चंपारण यात्रा के क्रम में पहुंचे। यहीं सत्याग्रह की रणनीति बनाई। जिस कूप पर स्नान किए, वहां अब स्मारक स्थल के साथ खूबसूरत गांधी पार्क बना।
- 1922 में ऑक्सफोर्ड विवि की तर्ज पर बने नए भवन का उद्घाटन हुआ। यहां की वेधशाला के साथ तारामंडल देशभर में विख्यात रहा। ढांचा अब भी कायम है।
इतिहास के आईने में काॅलेज की विरासत
- मार्च 1899 में भूमिहार ब्राह्मण सभा की ओर से काॅलेज स्थापना का प्रस्ताव पारित हुआ
- जून 1900 कोलकाता विश्वविद्यालय से संबद्धता के लिए आवेदन जमा किया
- 1909 में काॅलेज के लिए प्राे. राजेंद्र प्रसाद की ओर से भूमि चयन
- 1914 में पटना विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में था काॅलेज






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