बगहा में वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा ग्रामीणों और स्थानीय मछुआरों के सहयोग से 145 घड़ियाल के बच्चों को गंडक में छोड़ा गया। इसके साथ ही गंडक नदी में घड़ियालों की संख्या लगभग 500 पहुंच गई। गंडक नदी में घड़ियालों की सुरक्षा एवं संवर्धन के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ( VTR ) प्रशासन ने 2018 में सर्वेक्षण कराया था
इसमें वाल्मीकिनगर से सोनपुर तक के 320 किलोमीटर में 250 घड़ियाल पाए गए थे। 2021 तक घड़ियालों की संख्या बढ़कर 350 के करीब पहुंच गई, लेकिन लक्ष्य के अनुरूप यह संख्या काफी कम थी। इसे देखते हुए घड़ियालों के संरक्षण के लिए आईटी डब्ल्यू एच के तहत घड़ियाल संरक्षण का कार्य शुरू कर दिया।

कैसे करते हैं संरक्षण
गंडक नदी के किनारे रेत में मादा घड़ियाल मई माह में 30 से 40 सेमी़ गहरा गड्ढा खोदकर 30 से लेकर 40 तक अंडे देती हैं, लेकिन यह अंडे पानी के दबाव से खराब हो जाते हैं। जिसे बचाने के लिए डब्लूटीआई (WTI) के सहयोग एक्सपर्ट के मदद से ऊंचे स्थान पर घड़ियालों के अंडों को रखा जाता है। इस वर्ष भी ऐसा ही किया गया था। इसके कारण 145 अंडों से शिशु घड़ियाल बाहर निकले हैं। जिन्हें सुरक्षित गंडक नदी में छोड़ दिया गया है।

मछुआरों को किया गया ट्रेन
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अधिकारी सुब्रत बहेरा ने बताया कि गंडक नदी किनारे पता कर पाना मुश्किल होता है कि घड़ियालों ने रेत में कहां अंडा दिया है। नतीजतन इसके लिए WTI और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने स्थानीय ग्रामीणों और मछुआरों को प्रशिक्षित किया और अंडों के संरक्षण व उसके प्रजनन का गुर सिखाया। यही वजह है कि वर्ष 2022 में गंडक नदी किनारे वाल्मीकिनगर से रतवल पुल तक 5 जगह घड़ियालों के अंडे मिले। इन अंडों को मछुआरों ने संरक्षित किया और फिर उसका हैचिंग कराया गया। इसके बाद तीन जगहों के अंडों से सुरक्षित प्रजनन हुआ जबकि दो जगहों के अंडे बर्बाद हो गए। इन तीन जगहों के अंडों का प्रजनन कर 148 घड़ियाल के बच्चों को गंडक नदी में छोड़ा गया।




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