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सूखते बिहार को 3 दिन की बारिश ने संभाला:72 घंटे की बारिश ने जून का कोटा पूरा किया,

बिहार में मानसून की कमजोर दस्तक के बाद भी बारिश सामान्य से 6 फीसदी अधिक हुई है। बीते 3 दिनों की बारिश ने पूरे महीने का कोटा पूरा कर लिया। एक से 27 जून तक राज्य में महज 99.5 MM बारिश हुई, जो सामान्य से 29 प्रतिशत कम थी। संकेत सूखे का था, लेकिन बीते 72 घंटे की बारिश ने हालात बदल दिए

इस कारण 30 जून तक राज्य में 172.3 MM बारिश हो गई, जो सामान्य से 6 प्रतिशत अधिक है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अब जुलाई में मानसून का पीक होगा। ऐसे ही बारिश हुई तो इस बार 30 सितंबर तक रिकॉर्ड टूट जाएगा।

13 साल में 5 बार सामान्य से अधिक बारिश

मौसम वैज्ञानिक आनंद शंकर का कहना है, ‘जून के अंतिम 3 दिनों में उम्मीद से अधिक बारिश हुई है। इससे सामान्य से कम बारिश का आंकड़ा पार हो गया है और अब राज्य में सामान्य से 6 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, 2009 से 2022 तक 13 वर्षों में जून में 5 बार औसत से अधिक बारिश हुई है। 13 साल में 2021 में सबसे अधिक औसत से 111 प्रतिशत बारिश हुई, जबकि 2011 में 37 प्रतिशत, 2013 में 5 प्रतिशत और 2020 में 82 प्रतिशत और अब 2022 के जून में 6 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।

3 दिन की बारिश से किसान खुश

मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में मानसून की दस्तक तो समय पर हो गई थी, लेकिन शुरुआत खराब रही। उत्तर बिहार में बारिश हुई, लेकिन दक्षिण बिहार सूखे की चपेट में रहा। मानसून सीजन में भी दक्षिण बिहार में गर्मी से लोगों का हाल बेहाल रहा। जून में बारिश नहीं होने से किसान भी काफी निराश हो गए थे, लेकिन आखिरी दिन हुई बारिश से अब चेहरे पर खुशी है।

कृषि विभाग के मुताबिक, राज्य में 35,000 हेक्टेयर में बिचड़ा डालना है। इस बार राज्य में 35.14 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होनी है। अब तक राज्य में अब तक महज 21.10 हजार हेक्टेयर में ही बिचड़ा डाला जा सका, क्योंकि बारिश की कमी थी। इस बार राज्य में 62.04 हजार हेक्टेयर में रोपनी होने का अनुमान है।

किसान सेना के प्रदेश अध्यक्ष सुदामा पांडेय की मानें तो जून में बारिश ने काफी निराश कर दिया था। 27 जून तक तो लग ही नहीं रहा था कि बारिश होगी, लेकिन 3 दिनों की बारिश ने बड़ी राहत दी है। वर्षा के इंतजार में खेती पिछड़ गई। कुछ किसानों ने तो बिजली के सहारे बिचड़ा डाल भी दिया, लेकिन उसमें भी अंकुरण नहीं हो पाया है। पानी के अभाव में कई समस्या सामने आई।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जहां खेतों में नमी रही उन क्षेत्रों के किसानों को अधिक समस्या नहीं हुई, लेकिन जहां ऐसा नहीं था वहां बारिश किसानों के लिए बड़ी समस्या थी। जून में मानसून की दस्तक कमजोर होने से सिंचाई के दूसरे संसाधनों से किसानों ने बीज डाल दिए, लेकिन अगर आगे मौसम ने साथ नहीं दिया होता तो परेशानी और बढ़ जाती।

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