गहड़वालों द्वारा जारी किया गया रोहतास जिले का पहला अभिलेख सोनहर का ताम्रपत्र है
शिवसागर
रोहतास जिले के शिवसागर प्रखंड मे सोनहर एक ऐसा गाँव जिसका उल्लेख राजा विजय चंद्र के ताम्र पत्र मे मिलता है .सोनहर निवासी राम खेलावन को यह अभिलेख खेत जोतते समय प्राप्त हुआ था .इनके पौत्र गरीबन महतो ने राष्ट्रीय संपत्ति समझ कर 11 मार्च 1959 को पटना के आयुक्त को सौप दिया था .इसी गाँव के शिव मन्दिर मे स्थापित बलुआ पत्थर की पूर्व मध्य कालीन नृत्यरत गणेश की मूर्ति स्थापित है .उसके समीप नंदी की भी उसी काल की एक मूर्ति स्थापित है .भगवान बिष्णु की एक बलुआ पत्थर की मूर्ति मिली थी जिसके गले मे वनमाला व कमर मे करधनी अलंकृत है .अधिकतर खंडित प्राचीन मूर्तियों का ढेर गाँव के पूरब व पश्चिम मे स्थित मंदिर के भीतर व बाहर मूर्तियों का ढे’र है .

कई ऐसी खंडित मुर्तिया हैँ जिसकी पहचान नहीं हो पायी हैँ .इस पहाड़ी की गोद मे कई प्राचीन रहस्य छिपे हैँ .प्राचीन सभ्यताओ की कई आनसुलझी पहेलियाँ अपने आप मे समेटे पूर्व मध्य कालीन सोनहर पहाड़ी संरक्षण के अभाव मे बिलुप्ति के कगार पर हैँ .गहड़वालो द्वारा जारी किया गया जिले का पहला अभिलेख व सोनहर का ताम्र पत्र है.यह अभिलेख गहड़वाल राजा बिजय चंद्र का एक घोषणा पत्र है.के पी जैसवाल शोध संस्थान के शोध अन्वेषक डॉ श्याम सुन्दर तिवारी के अनुसार इस गॉव की पहाड़ी का शोध वर्ष 2011 है.जिसमे पूर्व मध्य काल के अवशेष के रूप मे मृ’दभांड व मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए हैँ .

10 नवम्बर 1972 को शाहाबाद से अलग होकर रोहतास जिला अस्तित्व मे आया .सतभुजी सूर्य वंशी राजा सत्य हरिश्चन्द्र के पुत्र रोहितास्व द्वारा स्थापित रोहतास गढ़ के नाम पर इस क्षेत्र का नामकरण रोहतास हुआ .अंग्रेजो के ज़माने मे यह क्षेत्र पुरातात्विक महत्व का रहा है .सोनहर गाँव मे अनेक गढ़ो के अवशेष उनके शासन के प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैँ .रोहतास को यदि मूर्ति कला के क्षेत्र मे देखे तो यहाँ गुप्त काल से लेकर पूर्व मध्य युग तक मे मूर्ति कला के केंद्र रहे हैँ .






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