भागलपुर के सन्हौला प्रखंड के शाहूपाड़ा मध्य विद्यालय की यह तस्वीर सरकारी स्कूल में शिक्षा की अलग ही हकीकत बयां कर रही है। यहां चौथी कक्षा में 54 छात्र हैं। उनके लिए क्लास रूम भी है, लेकिन स्कूल प्रशासन ने उसे स्टोर बना दिया है। बच्चे काे बरामदे में पढ़ा रहे हैं। तर्क है कि बच्चे स्कूल का सामान चुरा लेंगे। बरामदे पर ब्लैक बोर्ड नहीं है, ताे शिक्षकों ने लोहे के गेट काे ही ब्लैक बोर्ड बना दिया है। शनिवार काे 14 छात्र बरामदे पर बैठकर पढ़ रहे थे।
प्रिंसिपल का कहना है, ‘बाहर से हवा आती, इसलिए यहां पढ़ाते हैं। जो कमरा खाली है, उसमें एमडीएम का सामान रखा है। 381 बच्चे इस स्कूल में नामांकित हैं। कमरे और अन्य चीजों का काफी अभाव है। विकास मद की राशि अब तक नहीं आई है।’

भागलपुर के सन्हौला प्रखंड के मध्य विद्यालय शाहूपाड़ा में ब्लैक बोर्ड नहीं रहने के कारण दरवाजा पर लिख पढ़ाते शिक्षक।
मध्य विद्यालय शाहूपाड़ा में है घोर अभाव
यहां बच्चों को पढ़ा रहे स्कूल के शिक्षक नरेंद्र ने बताया, ‘क्लास रूम खाली नहीं है। पिछले एक साल से बच्चों को बाहर ही पढ़ाया जा रहा है।’ इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि इस स्कूल में संसाधन का कितना घोर अभाव है।

कक्षा 4 को स्टोर रूम बना दिया गया है। इसमें बच्चों के रखने के बजाय आलू-प्याज और गैस सिलेंडर रखा जाता है।
स्टोर में सामान चोरी की डर से बैठाते हैं बरामदे पर
कक्षा चार में कुल 54 छात्रों का नामांकन है। छात्र बरामदे पर बैठकर ही पढ़ाई करते हैं। कुछ छात्रों ने बताया, ‘कक्षा चार के लिए कमरा भी है। पर स्कूल के गलत मैनेजमेंट के कारण सभी छात्र बरामदे पर बैठकर पढ़ते हैं। कक्षा 4 के कमरे को स्टोर रूम बना दिया गया है। ऐसा नहीं कि स्टोर रूम में जगह नहीं है। शिक्षक और शिक्षिका को लगता है कि बच्चे स्टोर रूम से समान चोरी कर लेंगे। इसलिए उन्हें कमरे से बाहर बरामदे पर बैठा कर पढ़ाया जाता है।’
‘सोमवार को BEO को जांच के लिए भेजेंगे कि स्कूल की क्या स्थिति है, फिर देखेंगे कि क्या करना है।’






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