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मुजफ्फरपुर : चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस, सड़कों पर नहीं उतरे प्रदर्शनकारी, लेकिन बंद रहे बाजार-स्कूल

अग्निपथ के खिलाफ सोमवार को भारत बंद के बावजूद शहर शांत रहा। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती के कारण प्रदर्शनकारी सड़काें पर नहीं उतरे। लेकिन, पहले बिहार बंद, फिर रविवार के बाद भारत बंद से लगातार तीसरे दिन बाजार प्रभावित रहा। स्कूल-बाजार बंद रहे। दिनभर ट्रेन का परिचालन बंद रहने और बसें आदि नहीं चलने से लाेगाें काे भारी परेशानी हुई।

6 दिनाें से जिला समेत बिहार में हाे रहे उपद्रव के कारण अधिकतर लाेगाें ने अपनी यात्रा कैंसिल कर दी। हालांकि, जरूरी काम से जिन्हें बाहर जाना था, वे किसी तरह रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड ताे पहुंच गए। लेकिन, ट्रेन-बस बंद रहने से यात्रा नहीं कर पाए। स्टेशन व बस स्टैंड पर ही वक्त गुजारना पड़ा। हालांकि, दाे दिन पहले हुए बिहार बंद की तुलना में सोमवार को अधिक चहल-पहल दिखी।

चाैराहों की दुकानें खुली रहीं। पर, मुख्य बाजार सूतापट्टी, सरैयागंज, माेतीझील, कल्याणी, जवाहरलाल राेड आदि इलाकों में अधिकतर प्रतिष्ठानाें के शटर गिरे रहे। चैंबर ऑफ काॅमर्स के महासचिव सज्जन शर्मा के मुताबिक, 3 दिनाें में तकरीबन 3 हजार कराेड़ के व्यापार प्रभावित हुए। बैंक एसाेसिएशन नेता डीएन त्रिवेदी ने कहा कि ग्राहकाें के कम आने व नेट बैंकिंग बाधित हाेने से चेक क्लीयरेंस समेत 150 कराेड़ का काराेबार प्रभावित हुआ। अधिकतर एटीएम भी कैश आउट हाे गए। ग्राहक न एटीएम से पैसे निकाल सके और न ही क्रेडिट-डेबिट कार्ड या अन्य नेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर सके।
विपक्षी दलों ने कहा- हमने बंद नहीं बुलाया, सिर्फ नैतिक समर्थन था
राजद, कांग्रेस, वामदल समेत अन्य विपक्षी दलाें ने बंद का समर्थन किया था। लेकिन, पार्टी नेता न ताे सड़क पर उतरे और न ही बंद बुलाने की बात कही। सबका कहना था कि बंद को नैतिक समर्थन है। राजद, कांग्रेस, आइसा ने भी कहा कि उनलाेगाें का समर्थन था। एआईडीएसओ ने खुदीराम बाेस स्मारक पर धरना दिया। कहा-सरकार सेना का भी निजीकरण कर युवाओं का भविष्य बर्बाद करने पर तुली है। आइसा कार्यकर्ताओं
ने शाम में विराेध मार्च निकाला।

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