कोरोना काल के बाद महावीर मंदिर खुलने के बाद भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। पहले मंगलवार को जितनी भीड़ होती थी उतनी भीड़ शनिवार और रविवार को होने लगी है। सामान्य रूप से मन्दिर में मार्च, अप्रैल, मई एवं जून महीने में सबसे अधिक भीड़ रहती है। मन्दिर में भक्तों की भीड़ की एक कसौटी नैवेद्यम् की बिक्री है।
मंदिर के इतिहास में पहली बार नैवेद्यम् की बिक्री एक लाख किलो से भी अधिक प्रति माह हुई। अप्रैल में नैवेद्यम् की कुल बिक्री 1,18,946 (एक लाख अठारह हजार नौ सौ छियालीस) किलो हुई और मई महीने में यह विक्रय 1,16,698 (एक लाख सोलह हजार छः सौ अंठानवे) किलो हुआ।
जून में भी 15 दिनों में यह बिक्री 58,822 (अंठावन हजार आठ सौ बाईस) किलो हुई यानी जून के पहले 15 दिनों में भी यही क्रम रहा। इस हिसाब से जून महीने में भी एक लाख किलो से अधिक की बिक्री अनुमानित है। तिरुपति के बालाजी मन्दिर के बाद देश के किसी मन्दिर में लड्डू की सबसे अधिक बिक्री महावीर मन्दिर में होती है और वह भी एक केन्द्र से। ऊपर सारे आँकड़े महावीर मन्दिर में हुई बिक्री के हैं।
दान में भी हुई बढ़ोतरी
भेंट-पत्रों में डाली गयी राशि में भी वृद्धि हुई है। पहले यह राशि एक लाख रुपये प्रतिदिन के हिसाब से आती थी। किन्तु पिछले ढाई महीनों में यह राशि कुल 1,12,73,713/- (एक करोड़ बारह लाख तिहतर हजार सात सौ तेरह) रुपया प्राप्त हुई है, जो प्रतिदिन के हिसाब से 1,48,338/- (एक लाख अड़तालीस हजार तीन सौ अड़तीस) रुपया बनता है। यह अवधि ऐसी है, जब भक्तों की संख्या सबसे अधिक होती है और लड्डू की बिक्री सर्वाधिक होती है। इसी प्रकार, इस अवधि में सबसे अधिक कर्मकाण्डीय पूजा-पाठ होता है।
पिछले ढाई महीनों में कर्मकाण्ड के सभी मदों में कुल 96,67,178/- (छीयानवे लाख सड़सठ हजार एक सौ अठतर) रुपया की राशि प्राप्त हुई है जिसमें केवल रुद्राभिषेक में 20,68,823/- (बीस लाख अड़सठ हजार आठ सौ तेईस) रुपया का शुल्क प्राप्त हुआ है। इसमें उस राशि का भी समावेश है जो पूजा-पाठ में लगने वाली सामग्री भी है जो मन्दिर की ओर से दी जाती है और मन्दिर द्वारा पुरोहितों को दी जाने वाली दक्षिणा राशि भी है। यह देश का शायद एक मात्र मन्दिर है जहाँ रसीद कटाने के बाद भक्त को पूजा-सामग्री या दक्षिणा पर एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता।
4 प्रतिशत धार्मिक न्यास बोर्ड को
महावीर मंदिर अपनी आय का 4 प्रतिशत बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड को शुल्क में देता है और इस बार आशा की जा रही है कि यदि कोरोना के कारण लॉकडाउन नहीं लगा या लम्बा आन्दोलन नहीं चला तो महावीर मन्दिर बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड को करीब एक करोड़ रुपया शुल्क के रूप में देगा। लेकिन, बारिश के महीनों के अलावा पितृपक्ष, पौष मास, खरमास में भक्तों की भीड़ कम हो जाती है।






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