शिक्षा विभाग ने विभाग से जुड़े जिला स्तर के अफसरों की बैठक पटना के दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान पटना में की। इसमें खुद शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सहित कई अफसर मौजूद रहे। बैठक में तय हुआ कि कैंप लगाकर शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं का निबटारा विभाग करेगा।
जितने भी पेंडिंग मामले हैं जल्द से जल्द निबटाइए
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि शिक्षक अगर अफसरों के कार्यालयों का चक्कर लगाते हैं और उनका काम नहीं होता है तो यह अफसरों की नाकामी मानी जाएगी और कार्यवाही की जाएगी। शिक्षक झोला लेकर आपके पीछे- पीछे घूमे यह अच्छी बात नहीं। सरकार की नीतियों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना हमारा काम है। प्राथमिक विद्यालय सरकार का असली चेहरा है।
उन्होंने यह भी कहा कि हम बार-बार कह रहे हैं कि परिवर्तन दिखना चाहिए। हम आपसे अगर कोई अवांछित उम्मीद करते हैं तो वह भी आप बता दीजिए। सरकार की ओर से जो काम करने की जिम्मेदारी आपको दी गई है हम सिर्फ उसी की उम्मीद आपसे करते हैं। हमको आपका सहयोग चाहिए। आइए हम सब मिलकर शिक्षा में व्यापक परिवर्तन करें। जितने भी पेंडिंग मामले हैं जल्द से जल्द निबटाइए।
कोई बच्चा तीन- चार दिन से स्कूल नहीं आ रहा तो अभिभावक से मिलिए क्यों अनुपस्थित है
उन्होंने कहा कि विभाग की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाइए कि मुख्य सचिव भी जिला स्तर के कार्यालय का निरीक्षण कर रहे हैं। इस बैठक के बाद भी सुधार नहीं होगा तो कार्यवाही की जाएगी। कहा कि शिक्षकों को परेशान करिएगा तो वे स्कूल में क्या पढ़ायेंगे। गांव के स्कूलों में जाकर निरीक्षण कीजिए। गलत नीयत के साथ निरीक्षण मत कीजिए। स्कूलों में क्या पढ़ाया जा रहा है यह जाकर देखिए। उन्होंने कहा कि आप लोग विभाग को समस्या रहित बनाइए। आप सही काम करिए हम हमेशा पीछे खड़े रहेंगे, लेकिन गलत नीयत से कुछ करेंगे तो कार्यवाही होगी। आप सभी योग्य अफसर हैं, सही दिशा में अपनी बुद्धि विवेक का इस्तेमाल कीजिए। गलत दिशा में जाने का परिणाम भी गलत होता है। कोई बच्चा तीन-चार दिन स्कूल नहीं आ रहा है तो देखना चाहिए कि वह बच्चा है आखरी स्कूल क्यों नहीं आ रहा है। उस बच्चे के अभिभावक से संपर्क करिए कि बच्चा स्कूल क्यों नहीं आ रहा।
मध्याह्न भोजन देने का मकसद है कि बच्चे नियमित स्कूल आएं
मध्याह्न भोजन देने का मकसद यही है कि बच्चे नियमित स्कूल आएं। जो अफसर या शिक्षक बच्चों के बारे में अभिभावक से पूछने जाएंगे तो उन्हें ही गांव वाले या बच्चे के परिवार वाले याद रखेंगे हमें नहीं। उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा होती है कि हम जिधर से गुजरे उस विद्यालय में जाकर देखें कि क्या हाल-चाल है लेकिन हम खुद ही जानते हैं कि अभी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों की कमी पूरी करने में हम लगे हुए हैं।
माह के प्रथम शनिवार को सेवानिवृत्ति मामले के लिए कैंप
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने भास्कर से बातचीत में बताया कि बैठक में क्षेत्रीय उपनिदेशक के साथ ही डीईओ, डीपीओ की बैठक बुलायी गई। शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिया है कि चाइल्ड फर्स्ट के साथ-साथ टीचर फर्स्ट की नीति अपनानी है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ शिक्षक को भी बेहतर माहौल देने का निर्देश उन्होंने दिया है। तय किया गया है कि अगले महिने से प्रत्येक माह के प्रथम शनिवार को 11 बजे (इस बार 2 जुलाई को पड़ेगा) हर जिले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना के कार्यालय में कैंप लगाया जाएगा।
इस कैंप में सेवा निवृत्ति के बाद के मामले देखें जाएंगे। उसका समयबद्ध निष्पादन किया जाएगा। इसी तरह वेतन भुगतान, एरियर या वेतन विसंगति के मामले को लेकर वर्किंग डेज में कोई अफसर के कार्यालय नहीं जाएंगे बल्कि हर माह के तीसरे शनिवार (इस माह 18 जून) को कैंप दोपहर एक बजे से लगेगा। उसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी और सभी डीपीओ रहेंगे।
अभी सिर्फ नियमित शिक्षकों का ही ट्रांसफर होगा
दीपक कुमार सिंह ने कहा कि जो नियमित शिक्षक हैं उनके ट्रांसफर का ही निर्देश दिया गया है। नियोजित शिक्षकों के ट्रांसफर के लिए मुख्यालय में निर्णय नहीं लिया गया है। दो माह के बाद एक-एक जिलावार मंत्री और विभाग के अफसर अभिभावकों को बुलाकर उनकी समस्याएं सुनेंगे और जानेंगे कि कितना सुधार हुआ है।



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