राजद की तरह ही तेजप्रताप यादव के ‘जन शक्ति परिषद’ ने अधिक से अधिक सदस्य बनाने का लक्ष्य तय किया है। परिषद ने इसके लिए सोशल मीडिया पर सदस्यता फॉर्म भी डाला है। इसे ‘मिशन एक करोड़ मेंबर’ का नाम दिया है। परिषद ने मेंबरशिप फॉर्म सोशल मीडिया पर अपलोड करते हुए लिखा है- ‘जन शक्ति परिषद का सदस्य बनने के लिए इस फॉर्म को भरें, बिहार के सभी 8406 पंचायत में ‘जन शक्ति परिषद’ का अपना कार्यालय होगा और आपके ब्लॉक को भ्रष्टाचार मुक्त, सरकारी स्कूल अस्पताल और थाना को दुरुस्त किया जाएगा।’
दिलचस्प बात है कि राजद का भी लक्ष्य एक करोड़ सदस्य बनाने का है। अभी की स्थिति के अनुसार जनशक्ति परिषद के सदस्यों की संख्या 30 हजार तो राजद के सदस्यों की संख्या 86 लाख के करीब है। दोनों संगठनों का मिशन एक ही है, लेकिन इसे लेकर राजद और जनशक्ति परिषद में बैठकें अलग-अलग हो रही हैं।

परिषद कार्यालय में बैठकर काम करते सदस्य।
2024 तक परिषद को बूथ स्तर पर मजबूत करने की तैयारी
परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रशांत प्रताप ने भास्कर से कहा कि तेजप्रताप यादव ने लालू प्रसाद के पदचिह्नों पर चलते हुए राजद को मजबूत करने के लिए ही इस संगठन को बनाया है। जनशक्ति परिषद जितना ही बड़ा होगा, उतनी ही मदद राजद को मिलेगी। साल 2024 तक पंचायत और बूथ स्तर पर जनशक्ति परिषद को मजबूत कर देना है ताकि राजद के लिए यह बैक बोन का काम करे। जैसे आरएसएस, बजरंग दल, विद्यार्थी परिषद भाजपा को मजबूती देने का काम करता हैं, वैसे ही जनशक्ति परिषद राजद को मजबूती देगा।

परिषद ने जिला इकाई में जिला प्रभारी, जिला अध्यक्ष, प्रखंड अध्यक्ष और पंचायत अध्यक्ष बनाए गए हैं।
दोनों संगठनों में संभव है टकराव?
परिषद के लोग भले ही कह रहे हों कि इससे राजद को फायदा होगा, लेकिन राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि ऐसा करने का मकसद है साल 2024 में राजद पर दबाव बनाकर कई सीटों पर दावा ठोका जा सके। इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होना है।
प्रशांत प्रताप कहते हैं कि बिहार के लगभग हर जिले में संगठन का विस्तार कर दिया गया है। जिला इकाई में जिला प्रभारी, जिला अध्यक्ष, प्रखंड अध्यक्ष और पंचायत अध्यक्ष बनाए गए हैं। तेजप्रताप गरीबों-वंचितों के मुद्दे पर उसी तरह चल रहे हैं, जैसे अभी तक लालू प्रसाद चलते रहे हैं। क्या 2024 के चुनाव में राजद से जनशक्ति परिषद अपने कैंडिडेट उतारने की मांग करेगा? इस सवाल पर प्रशांत कहते हैं कि यह तो समय बताएगा और फैसला लालू जी को लेना है। इधर इन सब सवालों पर राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन कहते हैं कि किसी भी संगठन को अपने विस्तार का हक है, इससे किसी को क्या दिक्कत हो सकती है।
परिषद के बनने के साथ ही राजनीतिक मंच की हो गई थी तैयारी
लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने जब ‘छात्र जनशक्ति परिषद’ का गठन किया था, वह समय ऐसा था जब उनके चहेते आकाश यादव को छात्र राजद के अध्यक्ष पद से हटाकर गगन यादव को अध्यक्ष बना दिया गया था। यह तभी साफ हो गया था कि इस संगठन को राजनीतिक मंच दिया जाएगा। राजनीतिक मंच दिए जाने के विरोध में ही बबलू सम्राट ने ‘छात्र जनशक्ति परिषद’ छोड़ दी थी। इसके बाद तारापुर में निर्दलीय उम्मीदवार देकर तेजप्रताप यादव ने साफ कर दिया था कि वे राजनीतिक मंच बनाने की ओर हैं। अब तो इसमें से ‘छात्र’ शब्द भी हटा दिया गया है।






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