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देवघर में स्थित ‘मनोकामना लिंग’ के नाम से प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ का मंदिर, दर्शन करने वालों की दूर होती है गरीबी “ॐ नमः शिवाय”

जे’ल का नाम सुनते ही मन में खूं’खार कै’दियों की तस्वीर सामने आ जाती है, लेकिन यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक झारखंड के देवघर यानी बाबा बैद्यनाथ धाम में स्थित शिवलिंग पर श्रृंगार पूजामें सजने वाला “पुष्प नाग मुकुट” यहां की जेल में ही तैयार किया जाता है।कामना लिंग के नाम से विश्व प्रसिद्ध बाबा नागेश्वर के सिर पर श्रृंगार पूजा के समय प्रतिदिन फूलों और बेलपत्र से तैयार किया हुआ “नाग मुकुट” पहनाया जाता है। यह नाग मुकुट देवघर की जेल में कैदियों द्वारा तैयार किया जाता है। इस पुरानी परंपरा का निर्वहन आज भी कैदी बड़े उल्लास से करते हैं।
बाबा बैद्यनाथ धाम के शीर्ष पुरोहित पंडित दिवाकर मिश्र ने बताया, “यह पुरानी परंपरा है। कहा जाता है कि आजादी के पहले एक अंग्रेज जेलर था।

उसके पुत्र की तबीयत अचानक बहुत ख’राब हो गई। उसकी हालत बिगड़ती देख लोगों ने जेलर को बाबा के मंदिर में “नाग मुकुट” चढ़ाने की सलाह दी। जेलर ने लोगों के कहे अनुसार ऎसा ही किया और उनका पुत्र ठीक हो गया। तभी से यहां यह परंपरा बन गई।”उन्होंने कहा कि इसके लिए जे’ल में भी पूरी शुद्धता और स्वच्छता से व्यवस्था की जाती है। जेल के अंदर इस मुकुट को तैयार करने के लिए एक विशेष कक्ष है, जिसे लोग “बाबा कक्ष” कहते हैं। यहां पर एक शिवालय भी है। देवघर के जेल अधीक्षक आशुतोष कुमार बताते हैं कि यहां मुकुट बनाने के लिए कैदियों की दिलचस्पी देखते बनती है।

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