महज डेढ़ माह बाद बारिश में शहर को डूबने से कैसे बचाया जाए, इस पर ठोस पहल करने की जगह निगम सरकार में पॉलीटिकल ड्रामा बुधवार की शाम चरम पर पहुंच गया। 5 मई यानी गुरुवार को बैठक बुलाई गई है। लेकिन, बोर्ड की प्रस्तावित बैठक स्थगित करने का पत्र नगर आयुक्त के नाम से बुधवार की शाम मेयर ई. राकेश कुमार पिंटू ने निर्गत किया। कुछ देर तक मेयर के स्टाफ पत्र रिसीव कराने के लिए भटकते रहे। लेकिन, शाम 5 बजते ही नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय तमाम स्टाफ के साथ कार्यालय से निकल गए।
बैठक स्थगित करने का मेयर का पत्र जब निगम कार्यालय में रिसीव नहीं हुआ तो मेयर व स्टैंडिंग मेंबर ने नगर आयुक्त के गेट पर इस पत्र को चस्पा दिया। यह भी नगर निगम के इतिहास में पहली बार ही हुआ कि मेयर नगर आयुक्त के गेट पर नोटिस चस्पाएं। इधर, पूर्व मेयर सुरेश कुमार ने कहा कि निगम का बजट अब तक नहीं पास होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
बजट पास करना मेयर का दायित्व है। बोर्ड की बैठक स्थगित करने की सूचना से विपक्ष को बड़ा हथियार मिल गया। विपक्ष ने निगम का बजट पास करने के लिए गुरुवार को प्रस्तावित बैठक में सभी पार्षदों से पहुंचने का आह्वान किया।
नगर निगम में चल रहे पॉलिटिकल ड्रामे के बीच गुरुवार को निगम बोर्ड की बैठक होगी। जिसमें बजट पास कराया जाएगा। जानकारों का कहना है, इसमें संख्या बल की कोई आवश्यकता नहीं है। मेयर इंजीनियर राकेश कुमार पिंटू, डिप्टी मेयर मान मर्दन शुक्ला बैठक में नहीं पहुंचते हैं तो पूर्व मेयर सुरेश कुमार, नंद कुमार प्रसाद साह अथवा कोई महिला पार्षद की अध्यक्षता में बैठक हो सकती है। बैठक में निगम बजट को पास किया जाएगा।


जबरन यूजर चार्ज लागू करना और प्रोसीडिंग नहीं जारी करना मनमानी
मेयर ई. राकेश कुमार पिंटू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि नगर आयुक्त हिटलरशाही कर रहे हैं। 19 अप्रैल को हुई निगम बोर्ड की बैठक की प्रोसीडिंग अब तक नहीं निकली है। वहीं, बैठक स्थगित करने का जब पत्र दिया तो नगर आयुक्त स्टाफ के साथ निकल गए। कार्यालय में ताला लगवा दिया। सब कुछ नगर आयुक्त ही हैं, तो मेयर, डिप्टी मेयर व पार्षद की जरूरत क्या। बोर्ड की रोक के बाद भी यूजर चार्ज लागू कर दिया। ट्रेड लाइसेंस के नाम पर कारोबारियों को परेशान किया जा रहा है।
निगम में यूजर चार्ज की वसूली सरकार के निर्देश पर हो रही है
नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय ने कहा कि बोर्ड की बैठक स्थगित करने के लिए कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जो आरोप मेयर लगा रहे हैं, वह सफेद झूठ है। किसी भी योजना की जांच कराई जा सकती है। पिछले तीन-चार माह में निगम प्रशासन का कोई एजेंडा पास नहीं हुआ है। यूजर चार्ज की वसूली सरकार के निर्देश पर हो रही है। ट्रेड लाइसेंस शुल्क की वसूली का निर्णय निगम बोर्ड ने पूर्व में लिया था। नियम कानून लागू करना हिटलरशाही कैसे हो सकती है।

बोर्ड की बैठक स्थगित होने से मेयर का कुनबा होगा कमजोर
मेयर, डिप्टी मेयर व वार्ड पार्षदों का कार्यकाल महज 33 दिन बचा हुआ है। चुनाव नहीं होने की स्थिति में 9 जून को नगर निगम बोर्ड भंग हो जाएगा। निगम में चल रहे पॉलिटिकल ड्रामे में फिर से निगम बोर्ड की बैठक स्थगित करने से मेयर का अपना कुनबा कमजोर पड़ेगा। पिछली बैठक में नगर आयुक्त सिटी मैनेजर को बैठक के लिए अधिकृत कर खुद स्मार्ट सिटी के राष्ट्रीय सेमिनार में चले गए। यह मेयर गुट को नागवार लगा। पॉलिटिकल ड्रामा के पीछे पौने दो करोड़ से फरदो नाला की उड़ाही व बोर्ड की बैठक में बजट को स्वीकृति नहीं मिलना है।
नगर विधायक ने फरदो नाले की सफाई का मामला उठाया। विजिलेंस जांच की भी बात हुई। विजिलेंस जांच की बात से नगर आयुक्त का मिजाज बदला। अब तक प्रोसिडिंग जारी नहीं हुई। इसी बीच तीन दिन पहले नगर आयुक्त नगर निगम के पास 175 करोड़ खजाना में रहने की बात सार्वजनिक कर चुके हैं।

पैसे की कमी नहीं बता कर सभी वार्ड के लिए एक-एक करोड़ से सड़क व नाला बनाने का प्रपोजल विकास शाखा को दे चुके हैं। नगर आयुक्त के इस फैसले से मेयर गुट के कई पार्षद भी उत्साहित हैं। पार्षद यह चाह रहे हैं कि किसी भी तरह से उनके वार्ड में ज्यादा से ज्यादा काम हो जाएं। एेसी स्थिति में 5 मई को बजट स्वीकृत करने के लिए पार्षदों में गोलंबदी बन रही है।



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