Breaking News

जानिए, किन गलतियों की माफी चाहते हैं तेजस्वी

RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के छोटे लाल तेजस्वी यादव अपने पिता के साए से निकल राजनीति की नई इबारत लिखने में जुट गए हैं। वे अब सामाजिक न्याय की राजनीति की जगह सबको साथ लेकर चलने की सियासत की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

अपने पिता की गलतियों को सुधारने में लगे हुए हैं। परशुराम जयंती के मौके पर भूमिहार-ब्राह्मण एकता मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में ये स्पष्ट रूप से दिखाई भी दिया। यहां वे एक याचक की भूमिका में रहे। लगभग 22 मिनट के अपने भाषण में वे बार-बार साथ आने, विश्वास करने और गलतियों को सुधारने का मौका देने की ही बातें करते रहे।

तेजस्वी किन गलतियों को सुधारने की बात कर रहे हैं पॉलिटिकल एक्सपर्ट की मदद से यहां हम बताने की कोशिश कर रहे हैं।

अब 30% की राजनीति का सेहरा उतारना चाहते हैं तेजस्वी
वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि तेजस्वी अब इस बात को समझ गए हैं कि MY(मुस्लिम-यादव) पार्टी के छाप से वे आगे नहीं बढ़ सकते हैं। उन्हें इससे बाहर निकलना होगा। यही कारण है कि वे अब अपनी पार्टी क सभी की पार्टी बताने में जुटे हुए हैं। वे A टू Z का नारा दे रहे हैं। तेजस्वी यादव के बयान के मायने बिहार के जातीय समीकरण से भी समझा जा सकता है। बिहार में मुस्लिम वोटर करीब 17% और यादव 13% हैं। कुल मिलाकर यह 30 फीसदी होता है।

मुस्लिम+यादव+दलित के कॉम्बिनेशन हुआ फेल
एक्सपर्ट कहते हैं कि 1995 के विधानसभा चुनाव तक बिहार के राजपूत और भूमिहार वोटरों की अच्छी खासी आबादी लालू प्रसाद यादव के साथ थी। रघुवंश प्रसाद, प्रभुनाथ सिंह, जगदानंद सिंह सरीखे नेताओं की पार्टी में अच्छी पूछ रही। लेकिन 1995 के चुनाव में सरकार बनने के बाद लालू यादव ने फॉरवर्ड जाति के वोटरों से किनारा करना शुरू कर दिया। उनका फोकस मुस्लिम, यादव और दलित रह गया। उन्हें मुस्लिम+यादव+दलित का कॉम्बिनेशन उन्हें हमेशा सत्ता में बनाए रखेगा। लेकिन उनकी इसी सोच को बिहार की जनता ने गलत साबित कर दिया।

सवर्णों के आरक्षण का विरोध करना पड़ा भारी
गलती की फेहरिस्त में आरक्षण के राह में रोड़ा बनना भी शामिल है। वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेल्लारी कहते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू फैमिली ने सवर्णों को मिले 10 फीसदी आरक्षण का विरोध किया। इसका खामियाजा यह हुआ कि रघुवंश प्रसाद, जगदानंद सरीखे नेताओं की भी हार हुई। इसके कारण सवर्ण उन पर भरोसा करने से बच रहे हैं।

नहीं मिट रहा जंगल राज का दाग
बता दें कि 1989 के आखिर से लेकर 2005 तक बिहार में लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल का शासन रहा. इस दौरान बिहार की सियासत में राजनीति और अपराध में तालमेल देखा गया। भ्रष्टा अपराधियों के राजनीतिक संरक्षण, उसके राजनीति में प्रवेश, रंगदारी और किडनैपिंग के मामलों का पूरे बिहार में ‌‌वर्चस्व कायम था।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.