गर्मी अपने चरम पर है, तेज धूप से जहां आम आदमी परेशान है वही इसका असर अब वाल्मिकी टाइगर रिजर्व के जानवरों पर भी देखने को मिल रहा है। तेज धूप के कारण पहाड़ों से निकलने वाली दर्जनों नदियां जो वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से होकर गुजरती हैं या तो सूख गई हैं या फिर कुछ सूखने के कगार पर हैं। प्राकृतिक जल स्रोत जैसे-जैसे सूख रहा है वैसे वैसे विभाग की चिंता बढ़ गई है। हालांकि इसकी क्षतिपूर्ति करने के लिए वन विभाग वाटर हॉल का निर्माण करा रही है। लेकिन इस वाटर हॉल को सुचारू रूप से चलाने के लिए वन विभाग के लोगों को बड़ी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है।
बनाए गए 50 वाटर हॉल
जानवरों को पानी मिले इसके लिए स्थाई और अस्थाई तौर पर वाटर हॉल के जरिए जानवरों तक पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। VTR के वन संरक्षक डॉ नेशामणि के. ने बताया कि टाईगर रिजर्व के विभाग क्षेत्रों में 24 पक्का और 26 कच्चा वाटर हॉल बनाया गया है। वन विभाग समय समय पर पानी भर रहा है। पानी भरने के लिए पानी का टैंकर का उपयोग किया जा रहा है। ताकि जानवरों को आसानी से पानी मिल सके।


ग्रास लैंड के पास बनाई जा रही है स्थाई व अस्थाई वाटर हॉल
VTR में जहां-जहां ग्रास लैंड है उन जगहों पर वाटर हॉल की व्यवस्था विभाग के द्वारा की जा रही है। ताकि ग्रास लैंड पर आने वाले शाकाहारी जानवरों को सुविधाजनक तरीके से पानी मिल सके। वही बाघों के लिए सुविधाजनक तरीका से भोजन भी मिल सके। ग्रासलैंड मैनेजमेंट के जरिए हाल के दिनों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ग्रास लैंड के इलाके में शाकाहारी जानवर पहुंचते हैं और उनके शिकार के फिराक में बाघ भी आ जाते। ऐसे इलाकों को चिन्हित कर अस्थाई तौर पर पक्का वाटर हॉल बनाया गया है। नदियों के सूखने के बाद जल संकट से निपटने के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के विभिन्न इलाकों में करीब 50 कच्चे और पक्के वाटर हॉल के माध्यम से जानवरों तक पानी उपलब्ध कराया जा रहा है





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