मुजफ्फरपुर के एईएस प्रभावित छह प्रखंडों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों के डॉक्टर नहीं हैं। इन प्रखंडों में पीएचसी बिना शिशु रोग विशेषज्ञ के ही चल रहे हैं। जिले में मुशहरी, पारू, बोचहां, मोतीपुर, मीनापुर, कांटी प्रखंड सर्वाधिक एईएस प्रभावित क्षेत्रों की सूची में हैं। इन प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्रों में सामान्य एमबीबीएस डॉक्टर ही बच्चों का इलाज करते हैं। एईएस इलाज के लिए जो ट्रेनिंग इन डॉक्टरों को दी गई है, उसी आधार पर बच्चों का इलाज किया जा रहा है
यहां तक कि सदर अस्पताल में भी सिर्फ तीन ही शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। सदर अस्पताल में चार अन्य डॉक्टरों की कमी को उधार से पूरा किया गया है। इसके बाद ही एईएस वार्ड शुरू हो सका है। यहां एईएस वार्ड में इलाज के लिए मुशहरी पीएचसी से दो और सरैया पीएचसी से एक मेडिकल डॉक्टर को बुलाया गया है। सभी डॉक्टरों का आठ-आठ घंटे का रोस्टर तैयार किया गया है।
सदर अस्पताल में पहले से एक पीडिया वार्ड और एसएनसीयू चलता है। इसके अलावा एक पोषण पुनर्वास केंद्र भी शिशु रोग विशेषज्ञ के जिम्मे है। सिविल सर्जन डॉ. सुभाष प्रसाद सिंह का कहना है कि सदर अस्पताल में एईएस का कोषांग भी बना दिया गया है और एक नोडल अफसर भी तैनात है। प्रखंडों में भी डॉक्टरों की दिक्कत नहीं है। जो डॉक्टर हैं, वे पूरी तरह से प्रशिक्षित हैं। डॉक्टरों को एईएस के इलाज के लिए एम्स से भी ट्रेनिंग दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले से कई बार शिशु रोग विशेषज्ञ की रिक्ति सरकार को भेजी गई, लेकिन अबतक डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हुई। एईएस प्रभावित प्रखंडों में वर्षों से शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। सदर अस्पताल में भी पहले दो ही शिशु रोग विशेषज्ञ थे। हाल में एक शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती की गई है। एईएस के अलावा पिछले वर्ष ब्रोंकोलाइटिस के कहर के दौरान भी बच्चों के डॉक्टर नहीं रहने से परेशानी हुई थी।
चमकी के लक्षण वाले तीन और बच्चे पीकू में भर्तीnull
चमकी के लक्षण वाले तीन बच्चे एसकेएमसीएच के पीकू में शनिवार को भर्ती किये गये। इनके सैंपल जांच के लिए भेजे गये हैं। रिपोर्ट आने के बाद पता चल सकेगा कि इन बच्चों में एईएस है या नहीं। एसकेएसमीएच में अबतक 14 बच्चों में एईएस की पुष्टि हो चुकी है। शुक्रवार को पीकू से बिना बताये चले गये एक बच्चे की खोजबीन स्वास्थ्य विभाग ने की। नोडल अफसर डॉ सतीश कुमार ने बताया कि बच्चे के परिजन से संपर्क किया गया। बच्चा पूरी तरह ठीक है। बच्चा पारू का ही रहने वाला है। इस बीच एईएस के मरीजों की संख्या बढ़ जाने से पीकू में ऑक्सीजन की खपत बढ़ गयी है। 100 लीटर ऑक्सीजन की खपत प्रतिदिन बढ़ी है। इस वक्त 250 लीटर ऑक्सीजन की खपत हो रही है।

एईएस को लेकर डॉक्टरों की छुट्टी रद्द
एईएस को लेकर सिविल सर्जन डॉ. सुभाष प्रसाद सिंह ने सभी डॉक्टरों की छुट्टी रद्द कर दी है। कई पीएचसी में तैनात डॉक्टरों ने शादी-विवाह में जाने के लिए छुट्टी के आवेदन सीएस कार्यालय में दिए थे, लेकिन सिविल सर्जन ने आवेदनों को निरस्त करते हुए कहा कि एईएस के समय डॉक्टरों को छुट्टी नहीं दी जा सकती है।
अब आईसीयू टेलीमेडिसीन सेवा की होगी शुरुआत
एईएस के लिए अब आईसीयू टेलीमेडिसिन सेवा शुरू होगी। स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक ने इसका पत्र जिले के एईएस के नोडल अफसर को भेजा है। सेवा मुजफ्फरपुर के अलावा अन्य जिलों में शुरू होगी। इससे पहले 25 अप्रैल को सदर अस्पताल के सभी डॉक्टरों व एएनएम की ट्रेनिंग होगी।



Leave a Reply