पुलवामा आ’तंकी ह’मले में शही’द हुए जवाली के धेवा गांव के तिलक राज की पत्नी सावित्री देवी का कहना है उन्हें पति की शहा’दत पर गर्व है। सावित्री देवी ने कहा पति की याद भुलाना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन अपने आपको किसी तरह संभाला है। मुख्यमंत्री ने बच्चों व बूढ़े सास-ससुर का सहारा बनने के लिए करुणामूलक आधार पर छह माह के भीतर सरकारी नौकरी दे दी थी। मुझे अपने पति की श’हादत पर गर्व है।शहीद तिलक राज एक कलाकार ही नहीं थे, उनमें खिलाड़ी के साथ देशभूमि की रक्षा का जज्बा भी कूट-कूट कर भरा था। अपने गांव के युवाओं को जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ चढ़कर भाग लेने का हौसला तो बंधाते ही थे, वहीं खुद भी किसी से पीछे नहीं थे।

शहादत के साथ उनकी गायकी को आज भी याद किया जाता है।उनके बलिदान के एक वर्ष बाद कुछ संबल तो भले ही स्वजनों को मिला हो, लेकिन उन्हें मिले जख्म अब भी हरे हैं। वीरनारी को सरकारी नौकरी मिलने पर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। हालांकि स्वजन अपने लाडले को कभी भुला नहीं पाए हैं। हालांकि शहीद की अंत्येष्टि पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधायक अर्जुन ठाकुर की मांग पर जितनी भी घोषणाएं की थी, छह माह के भीतर ही पूरी कर दी गई।अब स्वजनों की यह मांग भी है कि उनके घर से होकर सड़क अगर बन जाए तो शहीद के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वहीं बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे शहीद तिलक राज आज भी क्षेत्रवासियों के दिलों में बसे हुए हैं। उनका पहाड़ी डीजे गाना मेरा सिद्धू शराबी विवाह व अन्य समारोहों में खूब धूम मचाता है। युवाओं में तो तिलक ने शानू के नाम से अलग पहचान बना ली थी।

बुजुर्ग माता-पिता बोले, संबल तो मिला पर ज’ख्म हरे
शहीद के पिता लायक राम व माता विमला देवी का कहना है बेटे की शहादत पर नाज है कि उनका बेटा देश की सुरक्षा के लिए शहीद हुआ। परिवार को संबल तो मिला है, लेकिन जो जख्म जवान बेटे के जाने का मिला है वह कभी भर नहीं पाएगा। शहादत के समय सरकार ने कुछ घोषणाएं की थी, जो पूरा हो गई हैं। बहुत कम समय में धेवा गांव के स्कूल को स्तरोन्नत कर इसका नाम शहीद तिलक राज राजकीय उच्च विद्यालय कर दिया। तिलक की पत्नी को सरकारी नौकरी देकर मदद भी की है।



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