अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में विश्व शांति स्तूप तक जाने के लिए 8 सीटर केबिन वाले रोप-वे एवं सिंगल सीटर रोप-वे पर्यटकों के लिए खास हैं। रोजाना 1000 पर्यटक रोप-वे का लुफ्त उठा रहे हैं, जिनकी संख्या छुट्टी वाले दिन बढ़ जाती है। देवघर के मोहनपुर स्थित त्रिकूट पर्वत जैसे हादसा राजगीर में ना हो, इसे लेकर रोप-वे के मैनेजर गौरव कुमार ने बताया कि रोजाना परिचालन के 2 घंटे पहले मेंटनेंस और सुरक्षा की जांच-पड़ताल की जाती है। इसके बाद अपर और लोअर रोप-वे स्टेशन इंचार्ज से सूचना के बाद जांच कर परिचालन शुरू किया जाता है। 8 सीटर रोप-वे में आवागमन में 10 मिनट और सिंगल सीटर रोपवे में 15 मिनट का समय लगता है। सिंगल सीटर रोप-वे में 11 टावर हैं। जबकि 8 सीटर रोप-वे में 6 टावर लगे हुए हैं।
मोनोकेबल केंडूला डिटैचेबल ग्रिप तकनीक से बना है रोप-वे
आठ सीटर केबिन रोप वे निर्माण सह मेंटनेंस कंपनी ‘कन्विनियर एंड रोप वे सर्विसेज प्रा लि’ के डीजीएम सुप्रियो मंडल ने बताया कि मोनोकेबल केंडूला डिटैचेबल ग्रिप तकनीक से आठ सीटर केबिन रोपवे बनाया गया है। उन्होंने बताया कि देवघर जैसी घटना राजगीर में नहीं हो सकती है। क्योंकि निर्माण के दौरान बारीकी जांच में रत्नागिरी पर्वत के पत्थरों और मिट्टी का गहन जांच कर टावर का फाउंडेशन तैयार किया गया है। फिर टावर के उपर लोड, हवा का दबाब सहित अन्य तकनीकी पहलुओं को देखकर रोपवे का डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण कराया गया है।
डीजीएम ने बताया कि रोपवे की मिनिमम हाइट 4.5 तथा मैक्सिमम हाइट 25 मीटर है। रोजाना रोपवे परिचालन के लगभग दो घंटे पहले मेंटनेंस का काम किया जाता है। अपर से लोअर स्टेशन तक एक-एक केबिन का परिचालन कराकर मैनेजर द्वारा एनओसी जारी की जाती है। तब पर्यटकों को उसमें बैठने की इजाजत दी जाती है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए रोपवे को पूरी तरह से मजबूत और सुरक्षित बनाया गया है।
सीढ़ियों के साथ विशेष प्रशिक्षित टीम करती है रेस्क्यू
अगर तकनीकी कारणों से केबिन बीच रास्ते में रुक जाती है तो वर्टिकल रेस्क्यू के तहत केबिन में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने की भी व्यवस्था की गई है। सिंगल चेयर रोपवे से फोल्डेबल सीढ़ियों के सहारे निकालने की व्यवस्था है। आठ सीटर केबिन रोपवे से रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित टीम मौजूद है। रोपवे को चेन के सहारे इधर-उधर करने की भी सुविधा है। इससे रेस्क्यू आसान हो जाता है।
रोपवे प्रबंधक ने पर्यटकों से अपील की है कि वह निर्भीक होकर विश्व शांति स्तूप पर जाने के लिए बने रोपवे का आनंद ले सकते हैं। यहां त्रिकूट पर्वत जैसे हादसे की संभावना नहीं है।



Leave a Reply