बगहा का घोटाहवा टोला औषधी शहद उत्पादन का केंद्र बन रहा। VTR के बीचो बीच बसा इस टोला में आदिवासी थारू व धांगड जाती के लोग रहते है। गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बनाने एवं गांव के विकास की गति को तेज करने के लिए मधुपालन कर रही। महिलाओं के बदौलत इस गांव की तस्वीर बदल रही हैं। इस गांव में 70 घर की 40 महिलाओं ने मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग ले चुकी है। जिसमें से 20 महिलाएं मधु पालन कर रही है। यहां से निकलने वाले शहद औषधीय गुण से परिपूर्ण है।
जंगल के बीचो बीच होने के कारण जामुन व अन्य पौधा से पराग लेकर ये मधुमक्खी शहद का निर्माण करती हैं। जो औषधीय गुणों से भरा है। जंगल क्षेत्र में रहने के कारण रोजगार के लिए जंगल पर निर्भर होना पड़ता था। अब यहां की महिलाओं का जंगल पर निर्भरता खत्म हो गया। यहां की महिलाएं शहद का उत्पादन कर एक मिसाल कायम कर रही है। इसके साथ ही जंगल से निर्भरता खत्म करने की संदेश दे रही हैं। वागनी मिशन की ट्रेनर सत्येंद्र सिंह ने बताया कि जंगल के बीचों-बीच होने के कारण इस गांव में अन्य व्यवसाय करना संभव नहीं।

बॉक्स की संख्या 10 हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य
महिलाएं शहद उत्पादन के लिए बॉक्स का प्रयोग करती हैं। फिलहाल 300 बॉक्स लगा कर महीने का 2 क्विंटल शहद का उत्पादन कर रही है। लेकिन महिलाएं 10 हजार बॉक्स लगा कर शहद उत्पादन को 60 क्विंटल का उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
बक्से से शहद निकालने के लिए आता है मशीन
एक बॉक्स में 1 महीने में 6 से लेकर 10 किलो तक शहद तैयार होता है। जिसे निकालने के लिए बागवानी मिशन से जुड़े लोग मशीन लेकर आते हैं। इन मशीनों के सहारे शहद को निकाल लिया जाता है। साथ ही महिलाओं के द्वारा डब्बे में शहद को पैक कर 200 रुपया प्रति किलो के हिसाब से बेच दिया जाता है।



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