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छठ महापर्व पर जानिए सूर्य नगरी देव की महत्ता, छठ में उमड़ती है लाखों की भीड़,

सूर्य नगरी देव में चैत्र छठ करने बेतिया के नरकटियागंज के रहने वाले मनीष कुमार गुप्ता और उनकी पत्नी अंजुषा देवी भी पहुंचे हैं। पति और पत्नी छठ पर्व कर रहे हैं। पति मनीष कुमार गुप्ता एसएसबी में कार्यरत हैं।

दैनिक भास्कर को अंजुषा देवी ने बताया कि शादी के चार साल तक कोई संतान नहीं हुआ। अपने स्तर से दोनों ने काफी इलाज कराया, लेकिन फिर भी नहीं हुआ। इसके बाद छठी मैया से देव सूर्य मंदिर को लेकर मन्नत मांगी। इसके बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इसके बाद दोनों पति और पत्नी छठ करने के लिए देव सूर्य मंदिर पहुंचे हैं। मनीष ने अपने बेटे का नाम भी कर्ण रखा है।

चैत्र और कार्तिक दोनों छठ में बड़ी संख्या में व्रती आते हैं।

चैत्र और कार्तिक दोनों छठ में बड़ी संख्या में व्रती आते हैं।

पति की सेहत ठीक हुई
वहीं, झारखंड के रांची से छठ करने के लिए मंजू मिश्रा और उनके पति अंजेश मिश्रा देव पहुंचे हैं। मंजू मिश्रा ने दैनिक भास्कर को बताया कि उनके पति का स्वास्थ्य खराब रहता था, जिससे वे लोग काफी परेशान रहते थे। बड़े-बड़े डॉक्टरों के पास दिखाकर थक गए।

बेटा-बेटी भी पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहते थे। उनकी पढ़ाई ठीक से नहीं होती थी। पूरी तरह से हारकर उन्होंने देव सूर्य मंदिर में छठ करने की मन्नत मांगी। इसके बाद उनके पति अंजेश मिश्रा पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। फिर छठ करने के लिए देव आए हैं।

तालाब में स्नान के बाद लोग करते हैं भगवान भास्कर की उपासना।

तालाब में स्नान के बाद लोग करते हैं भगवान भास्कर की उपासना।

तालाब की भी है मान्यता
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि छठ करने से व्रति और श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है। सूर्यकुंड तालाब में स्नान कर भगवान सूर्य का दर्शन करते हैं। यहां इस तालाब से भी मान्यता जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि इसमें स्नान करने के बाद भगवान भास्कर की पूजा करने से कुष्ठ रोग दूर होता है। इस बार गर्मी भी काफी पड़ रही है। पारा लगभग 40 डिग्री पार कर चुका है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां छठ करने पहुंचे हैं।

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