जिस चिराग को अभी कोई नहीं पूछ रहा था, उनकी पूछ अचानक क्यों बढ़ गई? यह सवाल सबसे अधिक चर्चा में है। चिराग पासवान का कैसा इस्तेमाल भाजपा ने बिहार में नीतीश कुमार या उनकी पार्टी जदयू के लिए किया यह जगजाहिर है। भाजपा की सीटें बढ़ी और जदयू की घटीं। इसके बाद नीतीश कुमार ने कैसे बदला लिया वह भी सामने है। एक विधायक लोजपा से थे मटिहानी से रामजकुमार सिंह, उनको भी तोड़ कर जदयू में शामिल कर लिया गया। चिराग पासवान के घर में फूट हो गई। पार्टी टूट गई। चाचा पशुपतिनाथ पारस केन्द्र में मंत्री बनाए गए। चिराग को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया, न रामविलास पासवान की पत्नी रीना पासवान को रामविलास पासवान की जगह एडजस्ट किया गया। इस तरह चिराग पासवान अलग-थलग पड़ गए। वे कहते रहे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनके राम हैं और वे हनुमान हैं।
बोचहां उपचुनाव में दलित वोट बैंक को मिलेगी ताकत
नई राजनीति में चिराग पासवान और तेजस्वी यादव के बीच दूरी घटी है। चिराग पासवान के पास बहुत अधिक विकल्प भी नहीं है। वे चाहें तो बोचहां में एनडीए से बदला ले सकते हैं। चिराग इन दिनों गुस्से में भी हैं कि उनके पिता के नाम से एलॉट आवास को जिस तरह से खाली कराया गया, वह तरीका ठीक नहीं है। रामविलास पासवान और साथ ही भीम राव अंबेडकर की फोटो को उठाकर फेंकने और उसे पैरों तले रौंदने का आरोप लगाना यही बताता है।
चिराग पासवान, पासवान वोटर्स से कह भी रहे हैं कि रामविलास पासवान के अपमान करने वालों से बदला लेना है। वे साथ ही तेजस्वी यादव की तारीफ भी कर रहे हैं। यहां बता दें कि बोचहां में वीआईपी पार्टी के विधायक मुसाफिर पासवान के निधन के बाद खाली हुई सीट पर भाजपा ने अपना उम्मीदवार बेबी कुमारी को उतार दिया है। मुसाफिर पासवान के बेटे अमर पासवान ने राजद की शरण ले ली और राजद के उम्मीदवार बन गए। अमर पासवान को पासवान का वोट मिलना तय है लेकिन अब चिराग पासवान की वजह से इस वोट बैंक की ताकत और एकजुट होगी।
श्याम रजक ने कहा- अंबेडकर की धारा को मजबूत करने के लिए चिराग हमारे साथ
चिराग पासवान से सोमवार को राजद के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ दलित नेता श्याम रजक ने मुलाकात की। भास्कर ने श्याम रजक से बात की तो उन्होंने बताया कि ‘अंबेडकर की धारा को बढ़ाने में, मजबूत करने में और सांप्रदायिक ताकतों को परास्त करने में चिराग पासवान हमारे साथ आएंगे, ऐसा उन्होंने आश्वस्त किया है।’ इसका मतलब साफ है कि अगर चिराग पासवान खुल कर भी बोचहां उपचुनाव में राजद के साथ नहीं आते हैं तो परोक्ष रुप से राजद को जरूर फायदा पहुंचाएंगे। वैशाली में चिराग ने यही किया है।



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