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पीएम मोदी की थीम पर पेंटिंग को नहीं मिले खरीददार

बिहार दिवस के अवसर पर मधुबनी पेंटिंग के लिए प्रसिद्ध पद्मश्री दुलारी देवी ने पटना के गांधी मैदान में स्टॉल लगाया था। पिछले तीन दिनों में उनके स्टॉल से एक भी पेंटिंग नहीं बिकी। अपने स्टॉल में उन्होंने कई थीम पर पेंटिंग्स लगाईं थी जिसमें प्रमुख आकर्षण पीएम मोदी की थीम पर बनी पेंटिंग का था। उनका कहना है कि यहां के लोगों को ऐसी पेंटिंग में कोई दिलचस्पी नहीं है। हैरानी की बात यह है कि एक पेंटिंग न्यूनतम 6000 होने के बावजूद कोई खरीदार नहीं मिला।

दरअसल, बिहार दिवस के अवसर पर गांधी मैदान में प्रदर्शनी लगी है। इसमें एक स्टॉल पद्मश्री दुलारी देवी का भी है। इसमें न सिर्फ उनकी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगी है बल्कि वो पेंटिंग का लाइव डेमो भी दे रही हैं। स्टॉल में उन्होंने सीता जी का जन्म, राम-सीता का विवाह, कृष्णरास, डोली कहार, शराबबंदी, काली माता, छठ पूजा और पीएम मोदी की थीम पर पेंटिंग की प्रदर्शनी लगी है। सबसे सस्ता पेंटिंग 6000 का और सबसे महंगा 2 लाख का है। हालांकि, अभी तक पटना की प्रदर्शनी उनके लिए निराशा भरी रही है। लोग पेंटिंग देखने तो आ रहे हैं लेकिन कोई खरीदने का इच्छुक नहीं है। अधिकतम कीमत सुनने के बाद कई लोग तो हंस कर निकल गए।

पीएम मोदी की थीम पर बनी पेंटिंग।

पीएम मोदी की थीम पर बनी पेंटिंग।

दिल्ली में 4 पेंटिंग बिका, जिसमें से एक डेढ़ लाख का था

उन्होंने बताया कि इसके पहले दिल्ली के प्रगति मैदान में उनकी मधुबनी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगी थी। तब वहां के लोगों खूब दिलचस्पी दिखाई। दुलारी देवी ने बताया कि इनकी पेंटिंग के लिए पूरे देश से ऑर्डर आता है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को हमारी पेंटिंग काफी पसंद आई। वहां एक व्यक्ति ने एक पेंटिंग को डेढ़ लाख में खरीद लिया। उनका कहना है कि जो लोग इस पेंटिंग की खासियत समझते हैं, वह इसकी कीमत नहीं देखते और इसे लेकर जाते हैं। यही मेरे लिए बहुत ही सम्मान की बात है।

पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका

दुलारी देवी बचपन से गरीबी को मार झेलती रही और मात्र 12 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। पैसे की कमी होने की वजह से उन्हें दूसरे के घरों में काम करना पड़ा लेकिन फिर भी उन्होंने अपने अंदर के हुनर को हमेशा जीवित रखा। इनकी कला के लिए आज इन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। बिहार के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने दुलारी देवी की योग्यता को सराहा है।

पदमश्री महासुन्दरी देवी के घर में काम करते हुए सीखा मधुबनी पेंटिंग

भास्कर से खास बातचीत में दुलारी देवी ने बताया कि पद्मश्री महासुंदरी देवी के यहां उन्होंने 25 साल काम किया। वहीं पर उन्होंने पहली बार मधुबनी कला को देखा। उन्होंने बताया, ‘महासुंदरी देवी को देखकर मेरे मन में ऐसी चित्रकारी करने का विचार आया। लेकिन घर पर कोई रंग या कागज नहीं थे। मैंने मिट्टी पर गोबर से लिपाई (पुताई) की और उसी पर लकड़ी से मछली, सुग्गा(तोता), पेड़ की आकृतियां बनाई।’ उनके द्वारा इस तरह से चित्रकारी शुरू करने पर लोगों की प्रतिक्रिया को बताते हुए दुलारी ने कहा, ‘कई लोग कहने लगे कि लकड़ी से लकीर खींचने पर लोग भिखमंगा बन जाते हैं। लेकिन मैंने सबको बताया कि इसमें मेरी रुचि है। जब महासुंदरी देवी को मेरे इस रुचि के बारे में पता चला तो उन्होंने मुझे नियमित रूप से मधुबनी चित्रकला का प्रशिक्षण देना शुरू किया।

डोली कहार की थीम पर बनी पेंटिंग।

डोली कहार की थीम पर बनी पेंटिंग।

बच्चों को मधुबनी पेंटिंग के लिए जागरूक करना है मकसद
दुलारी देवी अब तक 5000 से ऊपर लोगों को मधुबनी पेंटिंग के प्रशिक्षण दे चुकी हैं। साथ ही वह चाहती हैं कि बिहार का हर बच्चा मधुबनी पेंटिंग सीखें। उन्होंने कहा, ‘हमारे समय में तो इतनी सुविधाएं नहीं थी लेकिन आज के जमाने में बच्चों के पास हर तरह की सुविधा मौजूद है। ऐसे में बच्चे इसका लाभ उठाएं और मधुबनी पेंटिंग के प्रति अपनी रुचि बढ़ाए। खरीदार उनकी पेंटिंग को देखने तो आ रहे हैं लेकिन खरीदने नहीं आ रहे हैं। इसी मकसद से मैं आज गांधी मैदान में अपने मधुबनी पेंटिंग की लाइव डेमो कर रही हूं। ताकि बच्चे इसे देखें और इसके महत्व के बारे में जाने। मधुबनी पेंटिंग सीखना अपने आप में एक बहुत बड़ी कला है।’

काली माता की थीम पर बनी पेंटिंग।

काली माता की थीम पर बनी पेंटिंग।

दुलारी देवी ने अपने हाथों से बना एक बहुत ही खूबसूरत से पेंटिंग प्रधानमंत्री को भेंट किया था। आज दुलारी देवी केवल बिहार ही नहीं पूरे देश में अपनी कला को प्रस्तुत कर रही हैं। उनका कहना है कि बिहार से ज्यादा हमें दिल्ली से रिस्पॉन्स मिला। जो लोग मधुबनी पेंटिंग की महत्व को समझते हैं या इनकी कला को सम्मान देते हैं वैसे लोग इनकी बनाई पेंटिंग लाखों रुपए में भी खरीदते हैं। यह हैरानी की बात है कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के बावजूद कोई उनकी थीम पर पेंटिंग नहीं खरीद रहा है।

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