जहानाबाद सिविल कोर्ट में आचार संहिता उल्लंघन के मामले में पेशी होने आए पूर्व सांसद आनंद मोहन ने CM नीतीश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कि मेरा वनवास बेकार नहीं जाएगा। सत्ता में बैठकर पक्षपात करना ठीक नहीं है। सही समय आने पर इसका जवाब दिया जाएगा।
पूर्व सांसद ने कहा कि मैं जो जेल में बैठकर हड्डी गला रहा हूं। इसका एक-एक कर हिसाब लिया जाएगा। सत्ता में बैठकर पक्षपात करना सही नहीं है। मैं बड़े-बड़े को सत्ता पर देखा है और सत्ता जाते देखा है इसलिए सत्ता की घमंड नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से हंसते हुए मैं जेल में गया हूं उसी तरह से मैं जेल में से भी निकलूंगा।
सही ढंग से शराबबंदी नहीं किया गया
नीतीश सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि शराबबंदी अच्छी पहल है, लेकिन सही ढंग से शराबबंदी नहीं किया गया। उन्होंने अपने साथियों से कहा कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। मैं जल्द ही जेल से बाहर आऊंगा। इसलिए सभी साथी धैर्य से काम लें।

पेशी के लिए कोर्ट आए थे पूर्व सांसद।
दरअसल, 1999 में आचार संहिता उल्लंघन के मामले में नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। उसी में आनंद मोहन को मंगलवार को पेशी होनी थी। इसी के सिलसिले में मंगलवार को जहानाबाद आए थे। इस केस में आनंद मोहन को बरी कर दिया गया। कोर्ट परिसर में पूर्व सांसद आनंद मोहन को पेशी होने को लेकर गहमागहमी का माहौल था। पुलिस प्रशासन की कड़ी व्यवस्था कोर्ट परिसर में किया गया था।
गोपालगंज DM हत्याकांड में काट रहे सजा
सहरसा जेल में सजा काट रहे आनंद मोहन पर कई मामलों में आरोप लगे। अधिकतर मामले या तो हटा दिए गए या वो बरी हो गए। लेकिन 1994 में एक मामला ऐसा आया, जिसने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया। 5 दिसंबर 1994 को गोपालगंज के DM जी कृष्णैया की भीड़ ने पिटाई की और गोली मारकर हत्या कर दी गई। कहा जाता है कि इस भीड़ को आनंद मोहन ने उकसाया था।

इस मामले में आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली समेत 6 लोगों को आरोपी बनाया गया था। साल 2007 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई। हालांकि, 2008 में इस सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया था। साल 2012 में आनन्द मोहन ने सुप्रीम कोर्ट से सजा कम करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अब उनके परिवार वाले कोरोना का हवाला देते हुए उन्हें रिहा करने की मांग कर रहे हैं।




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