नई दिल्ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) अब मेड 8न इंडिया (Made in India) के कॉन्सेप्ट पर तेजी से काम कर रही है. रेलवे ने वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण पर और तेजी से काम करने की रणनीति तैयार की है. साथ ही वंदेभारत ट्रेनों को भी अब 200 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ाने के लिए अपग्रेड किया जा रहा है. इन ट्रेनों के अपग्रेड होने से जहां यात्रियों की यात्रा का समय बचेगा. वहीं यह ट्रेनें (Trains) हवा में बात करते हुए दुनिया के रेल सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती भी साबित होंगी
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में रेलवे बजट चर्चा (Railways Budget discussion in Lok Sabha) के दौरान एक संसद के सवालों को लिखित में जवाब देते हुए कहा है कि हमको परिस्थितियों के हिसाब से सीखना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि 2017 में आधुनिक ट्रेन को लेकर काम चालू हुआ था. इसके बाद 2019 में वंदेभारत ट्रेन (Vande Bharat Train) का निर्माण किया जा सका. यह ऐसी सक्सेस स्टोरी है जिससे दुनियाभर की रेलवे इंडस्ट्री (Railway Industry) हिल गई.
मात्र 115 करोड़ में तैयार हो जाती एक ट्रेन
रेलमंत्री ने वंदेभारत ट्रेन की खासियत और उसकी लागत के बार में सदन को अवगत कराते हुए यह भी बताया है कि अगर देश से बाहर निर्मित होने वाली ट्रेनों की बात की जाए तो एक ट्रेन के निर्माण पर करीब 290 करोड़ की लागत आती है. लेकिन वंदेभारत ट्रेन की लागत सिर्फ 110-115 करोड़ के आसपास आई है. और किसी भी टेक्निकल पैरामीटर पर दुनिया की किसी भी ट्रेन से पीछे नहीं है.

हर माह तैयार होंगी 8 वंदेभारत ट्रेन, प्रोडक्शन यूनिट्स हो रही अपग्रेड
मंत्री वैष्णव ने बताया है कि अब अगली श्रेणी की जो ट्रेन बन रही है उसमें एयर कुशन है, ताकि जर्नी में सुधार हो. अब सितंबर के महीने से जब सीरियल प्रोडक्शन चालू होगा तो शुरुआत में महीने में चार वंदेभारत ट्रेन निकलेगी, फिर 8 ट्रेन प्रति माह निकलेगी. सभी प्रोडक्शन यूनिट्स को अपग्रेड किया जा रहा है.
तीन साल में 400 ट्रेन का संकल्प, विदेश से इंपोर्ट नहीं होंगी
इन परिस्थितियों में विश्वास है कि अगले तीन सालों में 400 ट्रेन का संकल्प पूरा होगा. कोई ट्रेन इंपोर्ट करने की जरूरत नहीं है. वंदेभारत को भी 200 किमी के वर्जन के लिए अपग्रेड किया जा रहा है.



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