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बिहार: हैंडपंप मैकेनिक से फूलों की खेती का सफर, अब सालाना 12 लाख रुपए कमाई

सीतामढ़ी के किसान गेहूं, धान और सब्जी के साथ फूलों की खेती में भी रुचि लेने लगे हैं। जिले के रीगा प्रखंड के भवदेपुर निवासी राजेश कुमार माली ने इससे कमाई का नया रास्ता खोला है। उन्होंने फूलों की खेती से न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि 40-45 अन्य परिवारों को रोजगार भी दिया है। करीब 12 बीघा खेत में खिले रंग-बिरंगे फूल हर किसी का मन मोह ले रहे हैं।

राजेश बताते हैं कि 10 साल से फूलों की खेती करते आ रहे हैं। इससे पहले गांव में ही हैंडपंप मैकेनिक का काम करते थे। लेकिन उससे परिवार का भरण-पोषण अच्छे से नहीं चल रहा था। बच्चों को अच्छे से शिक्षा भी नहीं दे पा रहे थे। कहा कि अपने दोस्तों के साथ बंगाल घूमने गए थे कि कुछ काम तलाश करें। इसी दौरान बंगाल में फूलों की खेती देख इसकी प्रेरणा जगी। वापस आकर पहले 3-4 कठ्ठे में गेंदा और चेरी की खेती शुरू की। जैसे-जैसे आमदनी बढ़ी, वैसे-वैसे खेती बढ़ाई। आज 240 कठ्ठे (12 बीघे) में खेती कर रहे हैं। वर्तमान में 100 कठ्ठे में फूल लगा है, बाकी 140 में लगाया जा रहा है।

राजेश के खेत में काम करता मजदूर।

राजेश के खेत में काम करता मजदूर।

राजेश बताते हैं कि पिछले दो सालों से कोरोना की मार झेल रहे थे। फिर भी मजदूरों को वेतन दे रहे थे। थोड़ा कम लेकिन घर में बैठे-बैठे दे रहे थे। लेकिन आज फिर से हालात सही हो गए हैं। फूलों की बिक्री बढ़ गई है। राजेश ने बताया की फूलों की खेती से सालाना 12 लाख रुपए तक की कमाई हो जाती है।

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