पटना के होली बाजार में कोरोना का साया लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुका है। दो साल बाद एक बार फिर से रंगों का बाजार गुलजार है। रंग और पिचकारी का बजारा सजा भी है और खरीदार भी खूब पहुंच रहे हैं। बिक्री का आलम यह है कि होली के दो दिन पहले से ही माल कम पड़ने लगे हैं।
इस बार रंगों के बाजार से चाइनीज प्रोडक्ट नदारद है। पिचकारी से लेकर गुलाल तक देसी हैं। कुछ दुकानों में तो पटना में बने प्रोडक्ट भी बिक रहे हैं। हालांकि, पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों का असर भी बाजार में देखने को मिल रहा है। पिचकारी व अन्य सजावटी सामान 20% तक महंगे हुए है।

पटना में पिछले 10 वर्षों से पिचकारी का व्यापार करने वाले तनवीर आलम ने बताया कि डीजल-पेट्रोल की कीमत बढ़ने से लेकर ट्रांसपोर्टिंग चार्ज व मजदूर का खर्च बढ़ने के कारण महंगाई बढ़ी है।
कोरोना के कारण व्यापारियों ने कम मंगवाए माल
पटना सिटी के व्यापारी कृति यादव ने बताया कि इस बार उम्मीद से परे बिक्री हुई है। बिक्री का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि पिछले दो साल का स्टॉक माल भी इस बार होली से पहले निकल गया है। अभी भी होली के मेन बाजार में दो दिन का समय बाकी है और 90% दुकानों का स्टॉक लगभग समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि कोरोना के डर के कारण भी लोगों ने इस बार कम माल मंगवाए थे।

योगी और मोदी पिचकारी की खूब डिमांड है।
मोदी-योगी पिचकारी के साथ अबीर सिलेंडर की है डिमांड
पटना के व्यवसायी अनिमेश रस्तोगी ने बताया कि इस बार बाजार में अबीर सिलिंडर, मैजिक आइस रंग, मोदी-योगीराज पिचकारी, यूक्रेन स्पेशल मशीनगन, टंकी पिचकारी बच्चे ही नहीं, बल्कि किशोर-किशोरियां भी खरीद रहे हैं।

बाजार में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक खरीदारी करने पहुंच रहे हैं।
पटना सिटी में गाड़ी ले जाने से बचें
पटना के पटना सिटी का मच्छरहट्टा मार्केट रंगों के मुख्य बाजार है। यहां होलसेल रेट में रंग से लेकर पिचकारी और अन्य प्रोडक्ट मिल रहे हैं। खरीदार भी यहां खूब पहुंच रहे हैं लेकिन यहां खरीदारी के लिए आने के लिए संभव हो तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें या बाजार से पहले अपनी कार और बाइक पार्क कर दें। नहीं तो जाम से दो-चार होना पड़ सकता है। व्यापारी कृति यादव ने बताया कि इस बाजार में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।



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