निर्भया के चारों दो’षियों को अलग-अलग फां’सी देने का मा’मला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस पर शुक्रवार को सु’नवाई होगी। गौरतलब है कि निर्भया के दो’षियों की फां’सी पर रोक के खि’लाफ केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने ठु’करा दिया। न्यायमूर्ति सुरेश कैट की पीठ ने निचली अदालत के फैसले को र’द करने से इ’न्कार करते हुए कहा कि दो’षियों को फां’सी अलग-अलग देने के बजाय एक साथ ही दी जाएगी। पीठ ने सभी दो’षियों को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के अंदर सभी कानूनी उपाय पूरे करें। पीठ ने कहा कि इस समयावधि के बाद प्राधिकारी कानून के हिसाब से का’र्रवाई कर सकते हैं।पीठ ने कहा कि निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक यह मा’मला एक समान आदेश से तय हुआ है।

ऐसे में पीठ इस विचार से सहमत है कि सभी दो’षियों के खि”लाफ डे”थ वा’रंट एक साथ जारी होना चाहिए, न कि अलग-अलग। पीठ ने कहा कि निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने का कोई उचित आधार नहीं है।हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए प्राधिकारियों को भी आड़े हाथ लिया। पीठ ने कहा कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खा’रिज होने के बाद डे’थ वा’रंट जारी करने के संबंध में प्राधिकारी सोते रहे और इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।न्यायमूर्ति सुरेश कैट की पीठ ने कहा कि सभी जिम्मेदार प्राधिकारी नौ दिसंबर, 2019 तक दो’षी अक्षय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने का इन्तजार करते रहे। पीठ ने कहा कि अक्षय की पुनर्विचार याचिका 18 दिसंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट से खा’रिज हुई।

पीठ ने कहा कि इसमें कोई वि’वाद नहीं है कि निर्भया के साथ दोषि’यों ने युवती के साथ जो कुछ किया वह बेहद अमानवीय, ब’र्बर, क्रू’र और संगीन अ’पराध था। इस घ’टना ने पूरे देश को हिलाकर कर रख दिया था। पीठ ने कहा कि हमें ये कहने में कोई झि’झक नहीं है कि दो’षियों ने माम’ले को लंबा खींचा और अपील व पुनर्विचार याचिका दाखिल करने में भी देरी की। पीठ ने कहा दो’षी लगातार जीने के अधिकार का ह”वाला देकर बचते रहने की कोशिश करते रहे हैं।



Leave a Reply