महाराष्ट्र सरकार द्वारा पथरी को तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने के निर्णय पर हुए वि’वाद के बाद एक बार फिर शिरडी का साईं बाबा मंदिर सुर्खियों में आ गया है। श्रद्धा और सबुरी की प्रतिमूर्ति साईं बाबा का जन्म माना जाता है कि 28 सितम्बर सन 1835 को हुआ था। उनके भक्तों का मानना है कि जीवन में किसी भी तरह की समस्या हो या दिल में कोई मनोकामना हो, साईं बाबा के ये 7 वचन उनके भक्तों के जीवन की हर प’रेशानी को दूर कर देते हैं। कहा जाता है कि जो एक बार शिरडी में साईं दर्शन कर लेता है वो साईं का ही होकर रह जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर क्या है साईं नाम की महिमा और उनके वो 7 अनमोल वचन।
शिरडी के साईं बाबा के ये हैं 7 अनमोल वचन-
1-‘भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा।’
बाबा पर विश्वास रखने वाले भक्त की साईं सभी जिम्मेदारियों को अपने कांधे पर ले लेते हैं और वह उनकी कृपा से बगैर किसी परेशानी के पूरी होती हैं।
2-‘जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का।’
साईं के अनुसार जो व्यक्ति जिस भाव से उन्हें देखता है, उनका सिमरन करता है, वो उसे उसी रूप में नजर आते हैं और उसकी सभी मनोकामना पूरी करते हैं।

3-‘मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए।’
श्रद्धा एवं विश्वास के पावन साईं धाम पर जाने वाले की हर मनोकामना पूरी होगी।
4-चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर।’
बाबा की समाधि की सीढ़ी पर पैर रखते ही भक्त के सभी संकट और दुः’ख दूर हो जाएंगे। यानी साईं भक्त को अपने बाबा पर पूरा विश्वास रखना चाहिए कि उनकी की गई हर प्रार्थना जरूर पूरी होगी।
5-‘जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा।’
साईं के धाम जाकर दर्शन करने से सभी सम’स्याएं दूर हो जाएंगी।

6-‘त्या’ग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा।’
साईं ने अपने भक्तों को उन्होंने भरोसा दिलाया है कि मृत्यु के बाद भी भक्तों की पुकार पर मदद के लिए दौड़े चले आएंगे।
7-‘सबका मालिक एक।’
साईं ने परमपिता परमेश्वर की भक्ति के सही मायने समझाते हुए बताया है कि ईश्वर को पाने के हमारे रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन जिसे हम पाना चाहते हैं, वह एक ही है। अलग-अलग धर्म, पंथ के मार्ग से आगे बढ़ने पर हमें एक ही परमपिता परमेश्वर का साक्षात्कार होता है।



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