
वकील ने जे’ल मैनुअल के नियम 836 का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि ऐसे मा’मले में जहां एक से अधिक लोगों को मौ’त की स’जा दी गई है, वहां दो’षियों को तब तक फां’सी की स’जा नहीं दी गई है जब तक उन्होंने अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल ना कर लिया हो। वहीं ति’हाड़ जे”ल के अधिकारियों ने दिल्ली की अदालत को बताया कि केवल एक दो’षी की ही द”या याचिका लं’बित है, अन्य को फां”सी दी जा सकती है। वहीं दो”षियों के वकील ने दिल्ली की अदालत को बताया कि जब एक दो’षी की याचिका लं”बित है तो नियमों के अनुसार अन्यों को भी फां”सी नहीं दी सकती। फां”सी की स’जा का सामना कर रहे दो’षी विनय कुमार शर्मा की ओर से पेश वकील ए पी सिंह ने अदालत से फां’सी को अ”निश्चितकाल के लिए टाल देने को कहा क्योंकि कुछ दो’षियों के कानूनी उ’पचार अभी बाकी हैं। अभियोजन पक्ष ने कहा कि याचिका न्याय का मजाक है और यह फां’सी को टालने की महज एक तरकीब है। जेल के अधिकारियों ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा के समक्ष दायर स्थिति रिपोर्ट में इस याचिका का विरोध किया। अदालत ने बृहस्पतिवार को जेल अधिकारियों को नोटिस जारी करके दोषियों की याचिका पर जवाब मांगा था। दो’षी पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार के वकील ए पी सिंह ने अदालत से फांसी पर अनिश्चितकालीन स्थगन लगाने का अनु’रोध किया। उन्होंने कहा कि दो’षियों में कुछ के द्वारा कानूनी उपायों का इस्तेमाल किया जाना बचा हुआ है।

निचली अदालत ने 17 जनवरी को मा’मले के चारों दोषियों मुकेश (32), पवन (25), विनय (26) और अक्षय (31) को मौ’त की स’जा देने के लिए दूसरी बार ब्लैक वा’रंट जारी किया था जिसमें एक फरवरी को सुबह छह बजे तिहा’ड़ जे’ल में उन्हें फां’सी देने का आदेश दिया गया। इससे पहले सात जनवरी को अदालत ने फां”सी के लिए 22 जनवरी की तारीख तय की थी।अब तक की स्थिति में दो”षी मुकेश ने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर लिया है। इसमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समक्ष दया याचिका दाखिल करना भी शामिल है। उसकी दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को ठु”करा दी थी। मुकेश ने फिर दया याचिका ठु”कराए जाने को उच्चतम न्यायालय में चुनौ”ती दी जिसने बुधवार को उसकी यह अपील खा”रिज कर दी।



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