कोरोना की तीसरी लहर ने एक बार फिर शादियों पर ग्रहण लगा दिया है। शादियों से जुड़े कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। बैंड बाजा और रथ के कारोबार से जुड़े कितने परिवारों की स्थिति बदतर हो गई है। पिछले 3 साल से वे कर्ज में हैं। पटना में कई परिवारों की हालत ऐसी हो गई है कि उनके पास खाने को कुछ नहीं है। चाय पीने तक के पैसे नहीं हैं।
दरअसल, शादियों का सीजन शुरू होते ही बैंड बाजे की धमक खूब देखने को मिलती थी। लेकिन कोरोना ने इस पर विराम लगा दिया है। सरकार के सख्त आदेश हैं की शादियों में ज्यादा भीड़ भाड़ और किसी प्रकार का शोर-शराबा नहीं हो। बैंड बाजे पर भी प्रतिबंध है। यही वजह है कि इससे जुड़े कारोबारी को सीधा नुकसान हो रहा है। उनकी गाड़ियों पर धूल जमने लगी है।

शादी सीजन में भी नहीं चल पा रहा है धंधा।
सभी बुकिंग कैंसिल हुई
बैंड बाजे और रथ से जुड़े कई परिवार बड़े व्यापारियों से कर्ज लेने को मजबूर हैं। भास्कर की टीम ने बैंड बाजे के कारोबार से जुड़े कई परिवारों से बातचीत की। उनका दर्द जाना। भास्कर से बात करते हुए बैंड बाजे वाले उदय राय ने बताया की पिछले तीन साल से कर्ज लेकर खा रहे है। इस बार उम्मीद थी कि पैसा कमाएंगे। 8 बुकिंग हुई थी। लेकिन, फिर कोरोना की वजह से सारे बुकिंग कैंसल हो गए। घर की सारी ज्वेलरी भी गिरवी रखनी पड़ी है।

बैंड बाजा की गाड़ियों पर जम रही है धूल।
महाजन के कर्ज से जल रहा चूल्हा
बैंड बाजे से जुड़े कारोबारियों के चेहरे पर शिकन और आंखों में आंसू साफ दिख रहे हैं। वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी काफी चिंतित हैं। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई है। पैसा ही नहीं है तो पढ़ाएं कैसे। वहीं, बैंड बाजे के साथ-साथ शादियों में बग्घी चलाने वाले राजेश पासवान ने बताया की बग्घी घोड़ा चल नहीं रहा है। शादियों में बुकिंग नहीं हो रही है। बैठ कर खा रहे हैं। हर दिन महाजन से कर्ज लेकर ही घर का चूल्हा जलता है।



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