गया में पहाड़ से गिरने वाले पानी को जमा कर खेतों की सिंचाई की जाएगी। इससे सिंचाई की समस्या तो दूर होगी ही। साथ ही पहाड़ों पर भी हरियाली बढ़ेगी। मिट्टी रिचार्ज होगी वो अलग से । इसके लिए लघु जल संसाधन विभाग 100 गारलैंड ट्रेंच (माला आकार की नाली) बनाएगा। इससे देश भर में मशहूर कैमूर के मोकरी का गोविंद भोग चावल अब हर पहाड़ी क्षेत्र में पैदा होगा।
इससे जल-जीवन-हरियाली अभियान को भी फायदा मिलेगा और इसके तहत लघु जल संसाधन विभाग ने नए वित्तीय वर्ष में एक सौ गारलैंड ट्रेंच बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए जल्द ही वन एवं पर्यावरण संरक्षण विभाग को इसकी जानकारी दिया जाएगा। साथ ही वहां से अनुमति लेकर काम शुरू करेगा। गारलैंड ट्रेच से वैसे इलाकों में सिंचाई की बड़ी समस्या दूर होगी, जहां पानी की कमी रहती है।
पहाड़ के पानी की गुणवत्ता बढ़ जाती है
जमीन चिह्नित करने के बाद पहाड़ों का पानी रोकने की व्यवस्था की जा रही है। उसी पानी से खेतों की सिंचाई होगी। पानी जमा होने से पहाड़ों पर हरियाली भी बढ़ेगी। गर्मी के दिन में पहाड़ के जो पौधे सूख जाते हैं, मिट्टी रिचार्ज होने से उनमें नमी बनी रहेगी और पूरा इलाका हर-भरा रहेगा। पहाड़ों से निकलने वाले पानी में केमिकल होता है। पहाड़ों पर जो पौधे उगते हैं, उनमें जड़ी-बूटी होती है। उन्हीं पौधों से होकर पानी गुजरता है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता काफी बेहतर होती है। यह पानी खेतों में लगी फसल के साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर होता है।

हर पहाड़ी इलाके में होगा मोकरी का चावल
कैमूर जिले के मोकरी इलाके का गोविंद भोग चावल की मांग कुछ ऐसे ही कारणों से देशभर में होती है। मोकरी के एक नाले से पहाड़ का पानी आता है। उसी नाले के आसपास की जमीन में उपजे इस धान में कुछ अलग सुगंध होती है। साथ ही इसकी गुणवत्ता भी काफी बेहतर होती है। विभाग अगर गारलैंड ट्रेंच बना देगा तो मोकरी का चावल हर पहाड़ी क्षेत्र में होगा। इसको लेकर जिला कृषि पदाधिकारी कहते हैं कि गारलैंड ट्रेंज की तामीर से सिंचाई का बड़ा मसला हल होगा। साथ ही इसके बनने से बिहार के महंगे धान गोविंद भोग की पैदावार बढ़ेगी।

कई राज्यों में गोविंद भोग चावल की मांग
पानी के जमा होने से पहाड़ों पर हरियाली भी होगी। उन्होंने कहा कि पहले भी गोविंद भोग चावल कि यहां पैदावार होती थी। लेकिन, इसे किसान अपने स्तर से करते थे। अब सरकार की तरफ से इस को बढ़ावा दिया जाएगा इस चावल की कीमत ज्यादा होती है। दूसरे राज्यों में इसकी मांग ज्यादा है। ऐसी सूरत में किसानों को लाभ सीधे तौर पर पहुंचेगा। इस संबंध में डिस्ट्रिक्ट परामर्श पदाधिकारी सुदामा सिंह ने बताया कि इस चावल की खासियत यह है कि यह बहुत ही खुशबूदार चावल होता है।

इसकी कीमत ₹200 तक मार्केट में होती है। खासतौर पर यह कैमूर और पहाड़ी इलाकों में, जहां पानी की कमी नहीं है वहां पैदा होता है। लेकिन अब इसकी गया में शुरुआत हो रही है जो कि यहां के किसानों के लिए अच्छी बात है।



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