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निर्भया के ह’त्यारों से पूछी गई अंतिम इच्छा, चारों ने साधी ‘चुप्पी’, 1 को होनी है फां’सी…

निर्भया के मुज’रिमों को फां’सी पर लटकाये जाने का ‘डे’थ-वारंट’ जारी होने के बाद से, जमाने में जितना कौतू’हल-को’लाहल म’चा है। तिहाड़ जे’ल में फां’सी-घर से चंद कदम की दूरी पर फंदे पर झूलने की उल्टी गि’नती कर रहे ह’त्यारे उतनी ही ‘चुप्पी’ साधे बैठे हैं। इसके पीछे कारण या फिर ह’त्यारों की आगे की क्या रणनीति हो सकती है? इस सवाल का जबाब उन्हीं के पास हैं। अभी तक चार में से किसी भी मुजरिम ने तिहाड़ प्रशासन द्वारा पूछे जाने के बाद भी यह नहीं बताया है कि उनकी अंतिम इच्छा आखिर है क्या-क्या?तिहाड़ जे’ल (दिल्ली जेल) के महानिदेशक संदीप गोयल ने एजेंसी से बात करते हुए कहा, ‘अदालत से डे’थ-वा’रंट जारी होने के बाद जो कानूनी प्रक्रिया अमल में लानी चाहिए हम वो सब अपना रहे हैं।

इसी के तहत चारों मु’जरिमों से तिहाड़ जेल प्रशासन ने उनकी अंतिम इच्छा भी कुछ दिन पहले पूछी थी। अभी तक चार में से किसी ने भी कोई जबाब नहीं दिया है।’ संदीप गोयल ने कहा, ‘जे’ल प्रशासन ने चारों मुजरिमों से पूछा था कि डे’थ-वारंट अमल में लाए जाने से पहले वे किससे किस दिन किस वक्त जे’ल में मिलना चाहेंगे? संबंधित के नाम, पते और संपर्क-नंबर यदि कोई हो तो लिखित में जेल प्रशासन को सूचित कर दें। ताकि वक्त रहते अंतिम मिलाई कराने वालों को जेल तक लाने का समुचित इंतजाम किया जा सके।’जे’ल महानिदेशक के मुताबिक, ‘नियमानुसार दूसरी बात यह पूछी गयी थी चारों से कि क्या उन्हें अपनी कोई चल-अचल संपत्ति अपने किसी रिश्तेदार, विश्वासपात्र के नाम करनी है? अगर ऐसा है तो संबंधित शख्स/रिश्तेदार का नाम पता भी जेल प्रशासन को उपलब्ध करा दें। गुरुवार तक चार में से किसी भी मु’जरिम ने फिलहाल दोनों ही सवालों का जबाब नहीं दिया है।

जैसे ही उनका जबाब मिलेगा, जे’ल प्रशासन उसी हिसाब से इंतजाम शुरू कर देगा।’ तिहाड़ जे’ल के एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘चारों मु’जरिमों ने चूंकि दोनों में से किसी भी सवाल का जवाब अभी तक लिखित रूप से नहीं सौंपा है। लिहाजा फिलहाल उनकी जे’ल में बाकी कै’दियों की तरह ही सप्ताह में दो दिन परिवार वालों से मिलाई करा दी जा रही है। हां, फां’सी की स’जा अमल में लाए जाने वाले दिन से पहले उन्हें (मुजरिमों को) अंतिम बार किससे जे’ल में और कब मिलना है? यह फिलहाल लंबित ही है। हालांकि अगर फां’सी लगने वाले दिन से पहले तक, समुचित समय के साथ मुज’रिमों ने दोनों ही सवालों का जबाब नहीं दिया, तो जे’ल प्रशासन मान लेगा कि उन्हें कुछ नहीं कहना-सुनना है।’

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