शरा’बबंदी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने शुक्रवार को मुजफ्फरपुर में कहा कि बिहार में शराबबंदी के लिए गुजरात मॉडल लागू होना चाहिए। जिस तरह वहां पर लोग स्लिप लेकर जाते हैं और सीमित मात्रा में शराब मिलती है। उसी तरह बिहार में भी शराब मिले। इससे कभी कोई गरीब जहरीली शराब के सेवन से नहीं मरेगा।
उन्होंने कहा कि मंत्री, MLA, IAS, IPS और अन्य अफसर शरा’ब पीते हैं। वे सिर्फ रात में 10 बजे के बाद पीते हैं और घर में सो जाते हैं। उसी तरह सबको शराब पीना चाहिए। अमीरों की तरह शराब पीजिये। रात को पीकर चुपचाप घर मे सो जाएं। किसी को पता नहीं लगेगा। उन्होंने एक कानून का भी हवाला देते हुए कहा की अगर कोई शराब पीकर सार्वजनिक स्थल पर हंगामा करता है, पार्टी फंक्शन में जाता है तो उस पर कार्रवाई करें।
70 फीसदी गरीब जेल में हैं
मांझी ने कहा- अभी जो व्यवस्था है, वह गरीबों के हित मे नहीं है। आज 70% से अधिक गरीब जेल में है। पुलिस भी सिर्फ उन्हें ही पकड़कर जेल भेज रही है। हम वाल्मीकिनगर में थे तो वहां की महिलाएं रो रही थी। कह रही थी 12 बजे रात में पुलिस घर मे घुस जाती है। एक बोतल शराब के साथ पकड़कर जेल भेज देती है। घर के मर्द के जेल जाने के बाद खाने के लिए बच्चे बूढ़े मोहताज हो जाते हैं। उनका कौन ख्याल रखेगा। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ये अन्याय है। गरीबों को इस तरह से नहीं सताना चाहिए। अगर दवा के रूप से इसका सेवन करेंगे तो कोई खराबी नहीं होगी।

नेताओं और मंत्रियों के घर भी पड़े छापा
कोई खुलेआम शराब बेचता है तो उसे पकड़कर जेल भेजिए। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। कभी अमीरों के घर या नेता मंत्रियों के घर छापा पड़ा है क्या। सिर्फ गरीब के घर पुलिस को जब मर्जी होता है घुस जाते हैं। उन्हें पकड़कर जेल भेज देते हैं। ये कैसा कानून है भाई।
हमारे घर में बनती थी शराब
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हम जिस भुइयां मुसहर समाज से आते हैं। वहां पहले घर मे शराब बनती थी। हमारे माता-पिता और बच्चे साथ बैठकर शराब पीते थे। आज हमारी उम्र 78 साल है। आज तक हमने एक बूंद अपनी जीभ पर नहीं डाला। हमारा बेटा का उतर 40 पार करने वाला है। वह भी शराब नहीं पीता। उस समय कौन सा शराबबंदी कानून था। उस समय तो सब कुछ खुला हुआ था। शराबबंदी तो पांच साल से है। उससे पहले तो कुछ ऐसा नहीं था। लेकिन, हम खुद पर कंट्रोल रखेंगे तो जबरदस्ती कोई थोड़े पिला देगा। ऐसे सख्त कानून से बेहतर होगा कि लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाएं। ताकि गरीबों की जान बच सके।




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