वाराणसी स्थित श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण किया। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का लगभग 244 साल बाद रेनोवेशन हुआ। शिव और उनकी प्रिय उत्तर वाहिनी गंगा को एक-दूसरे से जोड़ने वाले श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की भव्यता इन दिनों देखते ही बन रही है। धाम का मंदिर चौक क्षेत्र अब इतना विशाल है कि यहां 2 लाख श्रद्धालु खड़े होकर दर्शन-पूजन कर सकेंगे।
तस्वीरों में देखें श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की भव्यता…

अब सावन के सोमवारों, महाशिवरात्रि के दौरान शिव भक्तों को दिक्कत नहीं होगी
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के परिक्रमा पथ में विग्रहों को गंगा स्नान करा कर विधि-विधान से उनकी प्राण प्रतिष्ठा का काम जारी है।


बाबा धाम अब मोक्षदायिनी गंगा से सीधे जुड़ गया है। शिवभक्त गंगा स्नान करने के बाद सीधे बाबा दरबार में हाजिरी लगा सकेंगे।

काशी के विद्वानों के अनुसार, धाम का लोकार्पण जिस समय और जिस तरह हो रहा है, उससे राष्ट्र का मान पूरी दुनिया में बढ़ेगा और देशवासियों का कल्याण होगा।

धाम की भव्यता इन दिनों काशी की गलियों से लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में मुमुक्षु भवन भी बनाया गया है। काशी में मोक्ष की कामना से आने वाले इस मुमुक्षु भवन में रह सकेंगे।

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण से पहले मंदिर के दोनों स्वर्ण शिखरों की सफाई कराई गई है। दोनों स्वर्ण शिखर रोशनी में दमक रहे हैं।

श्री काशी विश्वनाथ धाम का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 मार्च 2019 को किया था।

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का मंदिर चौक क्षेत्र अब इतना विशाल है कि यहां 2 लाख श्रद्धालु खड़े होकर दर्शन-पूजन कर सकेंगे।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के दोनों स्वर्ण शिखरों पर 1835 में महाराज रणजीत सिंह ने सोना चढ़वाया था। धाम के लोकार्पण से पहले दोनों स्वर्ण शिखरों की सफाई कराई गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर यानी आज बनारस आए। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर भव्य धाम की तस्वीरें भी साझा की हैं।

इसके साथ ही मंदिर चौक क्षेत्र में सुकून के साथ कुछ समय भी गुजार सकेंगे। बाबा धाम में बनाए गए म्यूजियम में लोग काशी के अतीत और विश्वनाथ धाम के निर्माण कार्य के पीछे की कहानी से भी रूबरू हो सकेंगे।

यह मंदिर पहली बार कब बना, इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग दावे हैं।

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद काशी के 8 लाख घरों में 7500 स्वयंसेवकों की टोली बनाई गई है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में 3361 प्रसाद वितरण केंद्र बनाए गए हैं।




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