BIHARBreaking NewsSTATE

‘नमी’ की आड़ में चल रहा है खेल, आधा समय बीत गया लेकिन खरीद मात्र पांच फीसदी

समय बीतता जा रहा है लेकिन राज्य में धान खरीद गति नहीं पकड़ पा रही है। खरीद की शुरुआत एक नवम्बर से हुई है। 31 दिसंबर तक खरीद होनी है। पर हकीकत यह है कि अब तक दो लाख टन धान की भी खरीद नहीं हो सकी है। यानी खरीद लक्ष्य का पांच प्रतिशत भी आंकड़ा नहीं हासिल नहीं हो सका है।

दक्षिण बिहार में अभी कटनी जारी

लगभग आधा दर्जन जिले तो ऐसे हैं जहां खरीद नाम मात्र की हुई है। समर्थन मूल्य का लाभ पाने वाले किसानों की संख्या भी मात्र 27 हजार ही है। खरीद इसी महीने यानी 31 दिसम्बर तक चलनी है और स्थिति यह है कि दक्षिण बिहार में अभी कटनी ही चल रही है। इस साल राज्य में पहली बार तीन चरणों धान की खरीद शुरू हुई। सरकार का यह प्रयोग बहुत सफल होता नहीं दिख रहा है। एक नवम्बर से 15 नवंबर के बीच जो अतिक्ति समय सरकार ने दिया उसमें बीस हजार टन धान की खरीद नहीं हो सकी। 15 नवंबर से राज्य के सभी जिलों में खरीद शुरू हुई। उसके बाद आंकड़ा थोड़ा बढ़ा, लेकिन अभी अधिंसख्य जिलों में धान तैयार होने में समय लगेगा। इसका मुख्य कारण धान में नमी की अधिक मात्रा का होना है।

धान खरीद का नया प्रयोग तभी सफल हो सकेगा जब खेती का समय बदला जाए। उसके बाद भी सरकार को नमी की मात्रा बढ़ानी पड़ेगी। अभी सरकार 17 प्रतिशत नमी वाला धान ही खरीदती है। बिहार में दिसम्बर तक धान में नमी 20 प्रतिशत से कम नहीं होती है। ऐसे में किसानों को बहुत नुकसान होता है।

सबसे अधिक खरीद सुपौल में

राज्य में अब तक 6976 एजेन्सियों ने धान की खरीद शुरू की है। इन एजेन्सियों में सबसे अधिक खरीद सुपौल जिले में 18 हजार टन हो सकी है। इस जिले में खरीद पहले चरण यानी एक नवंबर से शुरू है। लेकिन मुंगेर में मात्र तीन टन की खरीद हुई है। लखीसराय में मात्र दो सौ टन धान की खरीद हुई है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.