शहर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठाेस कार्रवाई नहीं हाेने से हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। गुरुवार काे प्रदूषण लेवल काफी हाई रहा। औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 346 ताे अधिकतम 500 पर रहा। इसके बावजूद सड़काें पर पानी का छिड़काव नहीं हुआ। ब्रह्मपुरा, बैरिया, बेला-नारायणपुर सहित विभिन्न मार्गाें में धूल के गुबार के बीच लाेग चलने काे विवश रहे।
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर भी नियंत्रण के उपाय नहीं हाेने से इन इलाकाें में ताे दिन में भी विजिविलिटी काफी कम रही। सड़काें पर नाले से निकाल कर छोड़ी गई गंदगी सूक्ष्म धूल कण के रूप में नाक से हाेकर फेफड़े के अंदर प्रवेश करने से सर्दी, जुकाम, एलर्जी की शिकायतें 35 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। सदर अस्पताल में सांस से जुड़े मरीजाें की संख्या में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लेकिन, नगर निगम का इस ओर ध्यान नहीं है।लगातार 10 दिनाें से एक्यूआई 300 पार रहने से बुजुर्ग और बच्चाें की सेहत पर असर पड़ा है।

कलेक्ट्रेट इलाके से ज्यादा प्रदूषित रहा एमआईटी और आसपास का क्षेत्र

बचाव के लिए क्या करें
मास्क पहनें, प्राणायाम करें, भाप लें और काढ़ा का सेवन करें।
गांवों में भी प्रदूषण
मनियारी के काजीइंडा चौक के बीचाें बीच हाईवे निर्माण में पिचिंग के लिए गिट्टी मिक्सिंग का काम चल रहा है। मशीन से निकलनेवाले काले धुएं से आसपास के दुकानदारों काे काफी परेशानी होती है। अन्य भटि्ठयों से भी धुआं निकलता है। लाेगाें काे सांस लेने में भी परेशानी हाेती है।
वेबिनार में बोले डाॅ. मनेंद्र- बढ़ता प्रदूषण मानव जीवन के लिए खतरे की घंटी, प्रतिवर्ष 20 लाख की हाेती माैत
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के अवसर पर यूजीसी-एचआरडीसी में वेबिनार का आयाेजन किया गया। संस्था के निदेशक डॉ. मनेन्द्र कुमार ने कहा कि खतरनाक तरीके से बढ़ता प्रदूषण मानव जीवन के लिए खतरे की घंटी है।

इसके लिए समाज से लेकर सरकार तक काे कदम उठाने हाेंगे। वायु, जल, ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के बीच जागरूकता फैलाना जरूरी है। देश में प्रदूषण के कारण हर वर्ष लगभग 20 लाख लोगों की मौत होती है। वायु प्रदूषण से अस्थमा, ब्रोन्काइटिस, इमफाइसीमा, फेफड़े का कैंसर व हृदय रोग के शिकार हाे रहे हैं।
जल प्रदूषण से चर्म रोग, पेट रोग, हैजा, पीलिया, दस्त, टाइफाईड आदि होते हैं। सर्दी में वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। जहरीली हवा के महीन कण पीएम 2.5 रक्त में प्रवेश कर जाते हैं, इससे धमनियों में सूजन आने लगती है और फिर दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। इस दिवस को भोपाल गैस त्रासदी की याद में मनाया जाता है जिसमें जहरीली गैस के रिसाव से हजारों लोगों की मौत हुई थी।
इस माैके पर महर्षि दयानन्द सरस्वती विवि के पूर्व कुलपति प्रो. केके शर्मा, यूजीसी-एचआरडीसी शिमला के निदेशक प्रो. डीडी शर्मा, रांची विवि के बाॅटनी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योति कुमार, दिल्ली के प्रो. एससी राय आदि ने विचार रखे।



Leave a Reply