
मुख्य आ’रोपित ब्रजेश ठाकुर, साइस्ता परवीन उर्फ मधु समेत 20 आ’रोपित जे’ल में हैं। सीबीआई की ओर से कोर्ट में दा’खिल चार्जशीट में इन आ’रोपितों पर ब’लात्कार व बाल यौ’न शो’षण रोकथाम अधिनियम (पॉक्सो ) की धा’रा 6 के तहत आ’रोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में लगाए गए इ’ल्जाम के साबित होने की स्थिति में आ’रोपितों को कम से कम दस साल कै’द व अधिकतम उम्रकै’द की स’जा हो सकती है। पूर्व में 14 नंवबर व 12 दिसंबर 2019 को फैसले की तारीख मुकर्रर थी। अधिवक्ताओं की ह’ड़ताल व विशेष कारणों की वजह से सु’नवाई की ता’रीख को आगे बढ़ी थी।

सीबीआई जां’च में पाया गया था कि बालिका गृह में पीड़ि’ताओं के साथ ना केवल बालिका गृह में कर्मचारी ग’लत काम कर रहे थे, बल्कि बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी भी उसमें शामिल रहे। बच्चियों का यौ’न शो’षण हुआ। हालांकि, आरो’पितों ने अदा’लत में सु’नवाई के दौ’रान अपने आप को बे’कसूर बताया था। साथ ही उन्होंने अदालत में मु’कदमे का सामना करने की मं’शा जाहिर की थी। उसके बाद यह सु’नवाई शुरू हुई थी।




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