टीकाकरण की मुहिम में गांव से शहरों के फुटपाथ तक, नंदलाल ने कराया दो हजार से अधिक टीकाकरण
- खुद ले चुके हैं दोनों डोज, दूसरे डोज को अहम मानते हैं नंदलाल
- मिलने वालों से भी करते हैं टीकाकरण की अपील
बेतिया, 23 नवंबर । गलियों से नुक्कड़ों तक, गांव से शहरों के फुटपाथ तक। नंदलाल जहां भी गए टीकाकरण का कारवां अपने आप उनके साथ जुड़ता गया। यह उनके पद और कद का ही असर था कि दो हजार से ज्यादा लोगों ने उनके कहने पर टीका लगाया। मूल रूप से गोड़ा सेमरा गांव, बेतिया से आने वाले नंदलाल पूर्वी चंपारण में फुटपाथ विक्रेता संघ के सचिव हैं। नंदलाल का कहना है कि हम फुटपाथ दुकानदारों को जितना खतरा कोविड संक्रमण का है, शायद ही किसी और को हो। एक के बाद दूसरा चरण और तीसरे की आशंका ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। मैं फिर से लॉकडाउन जैसे हालात नहीं चाहता था क्योंकि ऐसे में उन हजारों फुटपाथ दुकानदारों का क्या होता जिनसे उनके घर में दो वक्त की रोटी मिलती है।
गांव में अपने घर से की शुरूआत –
नंदलाल कहते हैं कोविड के दूसरे चरण में जब मैं बेतिया स्थित अपने गांव में था तभी लोगों को चरणबद्ध तरीके से टीके की शुरूआत हुई। मैंने विभिन्न मीडिया माध्यमों से इसके बारे में जाना। इसके बाद पहले मैंने खुद और पूरे परिवार का टीकाकरण कराया। फिर मैंने अपने गांव में भी लोगों को टीका लेने को कहा। मैंने अपना दोनों डोज पूरा कर लिया है। इसके बाद मैं वापस अपने काम पर पूर्वी चंपारण चला आया। यहां जितने भी फुटपाथ विक्रेता हैं सभी से रोज जाकर टीकाकरण के लिए आग्रह करने लगा। प्रतिदिन के आग्रह और पूछने का परिणाम आया कि गांव से लेकर पूर्वी चंपारण के फुटपाथ विक्रेताओं सहित करीब दो हजार से ज्यादा लोगों ने कोविड का प्रथम डोज ले लिया है। वहीं आधे से ज्यादा लोगों ने दूसरे डोज का भी टीका ले लिया है। अभी भी अगर कोई नया फुटपाथ विक्रेता जुड़ता है तो उसे सबसे पहले टीकाकरण कराने की सलाह और पूछताछ जरूर करता हूं।
दूसरे डोज को मानते हैं अहम –
नंदलाल कहते हैं कि कोविड के दोनों टीके के बिना हम पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। यह कोविड से बचाव का एकमात्र रास्ता है। वहीं नंदलाल का यह भी मानना है कि टीकाकरण के बाद भी हमें मास्क और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। कई मास्क बेचने वाले फुटपाथ दुकानदारों से कहता हूं मास्क बेचो ही नहीं पहनो भी।







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