पीके राय कॉलेज के मनोविज्ञान के विभागाध्याक्ष डॉ. आरएस यादव ने कहा कि किसी की जिंदगी सफलता से ज्यादा जरूरी नहीं है। जिंदगी रही तो इंसान कभी भी सफल हो सकता है। छात्रों को यह समझना चाहिए कि मंजिल पाना ही नहीं, मंजिल की ओर चलते रहना जरूरी है। सफलता का कोई पैमाना नहीं होता। और न ही एक बार असफल होने वालों के लिए सफलता का मार्ग बंद हो जाता है। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों को कई टिप्स भी दिए।

परीक्षार्थियों को जानना जरूरी
- – कभी भी दूसरों से अपने परिणाम की तुलना न करें।
- – साथ पढ़नेवाले की तैयारी या रिजल्ट से कुंठित नहीं हों।
- – अपने आप पर भरोसा रखें। यदि रिजल्ट मन मुताबिक नहीं आया तो फिर से प्रयास करें, ईमानदार प्रयास से जरूर सफलता मिलेगी।
- – जिंदगी सबको बराबर परिणाम नहीं देती, लेकिन जिंदगी का कोई मौका आखिरी नहीं होता।
माता-पिता की जिम्मेवारी सबसे अधिक
- बच्चों की क्षमता के अनुसार आकांक्षा पालें, बच्चों की दूसरे से तुलना न करें।
- – परीक्षा की तैयारी का सुझाव दें, लेकिन रिजल्ट के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं करें।
- – बच्चों से दोस्ताना संबंध बनाएं, ताकि वे खुद अपनी क्षमता माता-पिता से साझा करें।
- – रिजल्ट आने से पहले और बाद बच्चों की काउंसिलिंग करें और उनके साथ समय बिताएं।

इनसे सीखने की है जरूरत
– नोबल पुरस्कार जीतनेवाले महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर स्कूल में फेल हो गए थे। बाद में वही टैगोर देश का अभिमान बने।
– विश्व के सबसे अमीर लोगों की सूची में शामिल बिल गेट्स ने हावर्ड कॉलेज में बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी।
– जीनियस के रूप में पहचाने जाने वाले वैज्ञानिक आइंस्टीन सात साल की उम्र तक पढ़ नहीं पाते थे। बाद में वे फिजिक्स में दुनिया के सबसे बड़े नाम साबित हुए।

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