मुज़फ़्फ़रपुर : नयनदीप नेत्रालय में उपलब्ध है नेत्र रोग का आधुनिकतम उपचार : डा पल्लवी
नेत्र रोग से जुड़े रोगियों के लिए विश्वास और उपचार का केंद्र रहे नयनदीप नेत्रालय जो कभी नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ अरुण कुमार सिन्हा के नाम का प्रर्याय माना जाता था। आज इस संस्थान को उनके बेटे डॉक्टर शलभ कुमार सिन्हा और बहू डॉक्टर पल्लवी सिन्हा संचालित कर रही हैं । यह संस्थान नेत्र रोग के उपचार के क्षेत्र में नित नए आयाम गढ़ रहा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए डॉ पल्लवी सिन्हा कहती है कि नयनदीप नेत्रालय में तकरीबन डेढ़ दशक से मूलतः कैटरेक्ट और ल्यूकोमा (काला मोतियाबिन्द) जो आंख से संबंधित बीमारी है, के उपचार के क्षेत्र में काम चल रहा है। वह अपने अपने पति नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शलभ सिन्हा के साथ इस क्षेत्र में टीम यूनिट के साथ काम कर रही हैं। जिसमें नेत्र रोगों का लेजर के माध्यम और फेको विधि से उपचार करना शामिल है। इसमें रोगी को कोई कट अथवा पट्टी नहीं लगाया जाता है। शल्य चिकित्सा के बाद रोगी घर जा सकते हैं।



- आँख के परदे का प्रभावी उपचार *
डॉ पल्लवी ने बताया कि यह संस्था मुख्यतः सुपर स्पेशलिटी रेटिना से जुड़े बीमारी के उपचार के लिए ख्यात है जिसमें मूलतः आंँख के पर्दे का उपचार होता है। इसके लिए डॉक्टर शलभ सिन्हा ने गुजरात में विशेष ट्रेनिंग ले रखा है। रेटिना से जुड़ी बीमारी मुख्यतः डायबिटीज, उच्च रक्तचाप एवं हाई पावर वाले चश्मे के कारण उत्पन्न होता है । जिसकी जांच और उपचार नयनदीप नेत्रालय में लेजर माध्यम से की जाती है ।

*रोटरी ट्रस्ट से जुड़ कर प्रीमेच्योर नवजात के लिए करते हैं काम *
डा पल्लवी कहती हैं कि रोटरी के साथ जुड़कर नयनदीप ट्रस्ट प्रीमेच्योर नवजात शिशु के लिए भी नेत्र से संबंधित बीमारी की जांच और उपचार के लिए काम कर रही है । जिसमें प्रीमेच्योर नवजात के आंँख की रेटिना और समय से पहले जन्म लेने पर यत्र तत्र बने खून की नली का उपचार शामिल है । इसके लिए न सिर्फ प्रीमेच्योर नवजात का उपचार नयनदीप नेत्रालय में किया जाता है बल्कि ऑक्सीजन पर रहे ऐसे नवजातों का डॉक्टर शलभ संबंधित संस्थान में जाकर भी जांच और उपचार मुहैया कराते हैं । डॉक्टर पल्लवी ने बताया कि बहुतेरे निजी संस्थानों एवं केजरीबाल अस्पताल में संचालित एनएसयूआई में उपचार करा रहे बच्चों को डॉक्टर शलभ के द्वारा जांच और उपचार की सुविधा दी जाती है। क्योंकि ऐसे बच्चे को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।






Leave a Reply