मुज़फ़्फ़रपुर : आँखों की कम होती रौशनी की अनदेखी न करें : डा शलभ
नेत्र रोगियों के विश्वास का केंद्र और अत्याधुनिक नेत्र उपचार उपकरणों से सुसज्जित मुज़फ़्फ़रपुर के नयनदीप अस्पताल के ख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ शलभ सिन्हा ने कहा कि आंखों की कम होती रौशनी की अनदेखी न करें। जिस तरह से भारत में मधुमेह रोग का तेजी से प्रसार हो रहा है सबसे अधिक खतरा नेत्र और किडनी को है।
ऐसे में कम होती रोशनी की अनदेखी की जगह अविलंब नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से मिले और रेटिना की उचित जांच और समुचित उपचार करावें ताकि असमय अंधापन की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अधिकांश लोग मोतियाबिंद होने और उसका आसानी से उपचार कराने की सोच रखते हैं और अनदेखी के कारण असमय आँखों की रोशनी खो बैठते हैं।

प्रीमेच्योर नवजात की आँखों का उपचार भी है संभव *
डॉ सिन्हा कहते हैं कि विज्ञान और आधुनिकतम तकनीक के बूते आज हम उस दौर में है जब प्रीमेच्योर नवजात को बचा भी सकते हैं और उसकी आँखों का भी सही से उपचार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे प्रीमेच्योर बच्चे जन्म ले उन्हें अविलंब नेत्र रोग विशेषज्ञ से दिखावे ताकि उसके रेटिना के विकास और खून की नली की वास्तविक स्थिति की समुचित जांच हो सके। अन्यथा अपूर्ण बच्चा अंधापन का शिकार हो सकता है। इसका मुख्य कारण है कि अपूर्ण समय से जन्म लेने वाले बच्चो के रेटिना का समुचित विकास नहीं हो पाने का खतरा होता है। साथ ही खून की नली का विकास भी प्रभावित होने का डर होता है जो सही समय पर जांच से ही ठीक किया जा सकता है।

आँखों के लिए मधुमेह की बीमारी है बड़ा खतरा
डॉक्टर शलभ कहते हैं कि जिस तरीके से भारत में मधुमेह रोग का तेजी से प्रसार हो रहा है डब्ल्यूएचओ का मैप आकलन है कि 2025 तक दुनिया में भारत में ही मधुमेह रोगियों की संख्या सर्वाधिक होगी। ऐसे में लाजमी है कि नेत्र से जुड़ी परेशानियां भी यहां अधिक होंगे । क्योंकि मधुमेह से सबसे अधिक किसी को खतरा है तो किडनी और आंख ही है।

किडनी में खराबी होने पर इसके डायलिसिस और ट्रांसप्लांट की सुविधा है लेकिन एक बार आंख की रोशनी चली जाए तो इसका उपचार संभव नहीं। ऐसे में आवश्यक है कि हम अपने ऑंख के प्रति सजग और जागरूक रहें। खासकर मधुमेह के रोगी साल में एक बार अपने ऑंख की जांच नेत्र रोग विशेषज्ञ से करावे और रेटिना की स्थिति का आकलन करातें रहें। ताकि वे असमय अंधापन का शिकार होने से बचें।
मोबाइल का अत्यधिक उपयोग आँखों के लिए नुकसानदायक

नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉक्टर शलभ कहते हैं कि यूं तो पहले भी बच्चे मोबाइल का खूब उपयोग कर रहे थे। यू ट्यूब , विभिन्न तरीके के गेम्स ,फेसबुक , व्हाट्सएप आदि पर घंटों चैटिंग उनकी आंखों को नुकसान पहुंचा रहा था। लेकिन कोरोना संक्रमण के बाद जो हालात बने हैं और बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई का माध्यम मोबाइल बन गया है। जाने अनजाने उनको मोबाइल का अत्यधिक उपयोग करने होते हैं। ऐसे में लाजमी है कि बच्चों की आंखों पर चश्मा लगेंगे ।

डॉक्टर शलभ कहते हैं कि अभिभावक को चाहिए कि बच्चों के प्रति सजग रहें।उसे अन्य खेलों में जोड़ने का काम करें। कोशिश हो कि मोबाइल का बच्चे अत्यधिक उपयोग ना करें। क्योंकि यह आंखों की रोशनी को बुरी तरह से प्रभावित करता है।





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