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छठ पर तेजस्वी हुए ट्रोल, लिखा- शक्ति भले क्षीण हो, योगदान नहीं भूल सकते, यूजर ने पूछा-किसकी बात कर रहे, छठ या पिता की?

लालू प्रसाद के पुत्र और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने छठ के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। खास बात यह कि उन्होंने छठ के अस्तालचलगामी सूर्य को दिए जाने वाले अर्घ्य की व्याख्या महत्व के साथ की। उन्होंने कहा कि ‘डूबते सूर्य की पूजा करने वाला छठ विश्व का एकमात्र त्योहार है।’ तेजस्वी यादव ने लिखा है कि – ‘एक प्राणी की शक्ति भले क्षीण हो जाए पर उसके ऋण, जीवनकाल में उसके द्वारा दिए गए योगदान को भुलाया नहीं जाना चाहिए।’

‘किसकी बात कर रहे हो.. तेज बाबू छठ की या पिता जी की?’
तेजस्वी यादव की इस व्याख्या के बाद ढेर सारे लोगों ने उन्हें भी छठ की बधाई दी। शंभू सिंह नामक व्यक्ति ने जवाब में तेजस्वी यादव से पूछा कि -‘किसकी बात कर रहे हो.. तेज बाबू छठ की या पिता जी की? ‘दरअसल लालू प्रसाद लगातार बीमार चल रहे हैं। वे हार्ट और किडनी की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। अपनी जिद की वजह से वे बिहार में होने वाले विधानसभा उपचुनाव में आए और 10 दिनों तक बिहार में रहे। इस दौरान लालू प्रसाद, तारापुर, और कुशेश्वर स्थान चुनाव प्रचार में भी गए।

छह साल के बाद मंच पर भाषण देने चढ़े तो उनका पुराना तेवर खत्म हो चुका था। उन्हें तेजी से चलने में भी दिक्कत है। कमजोरी बढ़ी हुई है यह साफ दिखता रहा। उनकी याददाश्त अभी भी तेज है। चुनाव परिणाम के दूसरे ही दिन लालू प्रसाद को दिल्ली ले जाया गया।

जदयू प्रवक्ता ने भी साधा निशाना
जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने तेजस्वी की व्याख्या पर कहा है कि छठ जैसे त्योहार के प्रति लोगों की आस्था ही इसे महापर्व बनाती है। नेता प्रतिपक्ष को पूर्वांचल का अस्ताचल सूर्य या उगता सूर्य तो दिखता नहीं। वे तो प्रवासी बिहारी हैं। छठ में भी बिहार में नहीं दिखते हैं। कहा कि लालू प्रसाद तो काफी दिनों से 28 तरह की बीमारियों से ग्रस्त हैं। कोर्ट में भी यह बताया गया है। नीरज कुमार ने कहा कि ट्विटर पर छठ की आस्था व्यक्त करने की बजाय क्षेत्र में जाकर आस्था व्यक्त करनी चाहिए थी। जनता उनको खोजती रहती है और वे प्रवासी रहते हैं।

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