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परचून की दुकान से MBBS तक का सफर

मां के साथ दीपमाला सड़क किनारे परचून की दुकान लगाती है। उसका दुकान से MBBS तक का सफर बहुत उतार-चढ़ाव रहा है। दो बार NEET पास कर के भी जब MBBS नहीं मिला तो उसने एडमिशन नहीं लिया। वह अपने लक्ष्य से नहीं भटकी। अब इस बार उसने अपना सपना पूरा कर लिया है। उसे 720 में से 626 अंक मिले हैं।

बगहा पुलिस जिला के वाल्मीकीनगर की रहने वाली दीपमाला बहुत ही साधारण परिवार से आती हैं। पहली बार 2019 में उसने NEET क्वालीफाई किया तो कम रैंक आने की वजह से पटना आयुर्वेदिक कॉलेज में BAMS (Bachelor of Ayurveda, Medicine, and Surgery) में दाखिला मिल रहा था। लेकिन, दीपमाला MBBS करना चाहती थीं। इसी वजह से परिजन और लोगों के कहने के बावजूद उसने एडमिशन नहीं लिया। 2020 में दोबारा NEET की परीक्षा में बैठी इस बार फिर BAMS (Bachelor of Ayurveda, Medicine, and Surgery) में ही दाखिला मिल रहा था। 5 अंक से MBBS छूट गया। लेकिन, कुछ कर जाने का जज्बा व हौसला बुलंद हो तो गरीबी आड़े नहीं आती। उन्होंने दोबारा एडमिशन नहीं लिया।

बगहा की दीपमाला कुमारी।

बगहा की दीपमाला कुमारी।

2021 में मिला ऑल इंडिया रैंक 9420
दीपमाला फिर से 2021 में NEET का एग्जाम दी। तीसरी बार NEET क्रैक कर ऑल इंडिया रैंक 9420 ले आईं। वहीं, कैटेगरी रैंक 3538 मिला है। इस बार MBBS में दाखिला का रास्ता साफ हो गया है। इलाके में उसके इस मेहनत की खूब चर्चा हो रही है। दीपमाला ने वाल्मीकिनगर स्थानीय स्कूल नदी घाटी उच्च विद्यालय वाल्मीकिनगर से इंटर की पढ़ाई की है। सेल्फ स्टडी से उसने यह मुकाम हासिल किया है।

उसके माता-पिता पर्यटन नगरी में अलग-अलग जगहों पर कॉस्मेटिक की दुकान सड़क किनारे लगाते हैं और होनहार बिटिया उसमें उनका हांथ बटांती है। अपने मुकाम को हासिल करने के लिए वह काम के साथ-साथ पढ़ाई भी करती है। लगातार तीसरी बार सफलता मिलने पर उसके घर वाले खुश हैं। हालांकि घरवाले बस इतना ही जानते हैं कि लड़की अब डॉक्टर बन जाएगी।

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