स्वर्ण जड़ित मंदिर को शंकराचार्य स्वयं अयोध्या लेकर जाएंगे और रामलला के विग्रह को प्रतिष्ठित करेंगे। इन दोनों विषयों की घोषणा शंकराचार्य मेला स्थित अपने शिविर में 20 से 24 जनवरी तक होने जा रही धर्मसभा में करेंगे। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज 19 या 20 जनवरी को प्रयागराज आएंगे और मौनी अमावस्या का स्नान करने के बाद प्रस्थान होगा।
स्वर्ण जड़ित मंदिर को शंकराचार्य स्वयं अयोध्या लेकर जाएंगे और रामलला के विग्रह को प्रतिष्ठित करेंगे। इन दोनों विषयों की घोषणा शंकराचार्य मेला स्थित अपने शिविर में 20 से 24 जनवरी तक होने जा रही धर्मसभा में करेंगे। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज 19 या 20 जनवरी को प्रयागराज आएंगे और मौनी अमावस्या का स्नान करने के बाद प्रस्थान होगा।

162.6 हेक्टेयर या 402 एकड़ में स्थित मंदिर मूल रूप से खमेर साम्राज्य के लिए भगवान विष्णु के हिंदू मंदिर के रूप में बनाया गया था। जो धीरे-धीरे 12वीं शताब्दी के अंत में बौद्ध मंदिर में परिवर्तित हो गया था। इसका निर्माण सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय (१११२-५३ई.) के शासनकाल में हुआ था। पर्यटक यहां वास्तुशास्त्र का अनुपम सौंदर्य के साथ ही सूर्योदय और सूर्यास्त देखने भी आते हैं।





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