पटना की सड़कों के किनारे इन दिनों दीपावली के दीयों की खूबसूरती हर तरफ दिखती है। क्या आपको पता है कि इन्हीं सड़कों के किनारे कुछ ऐसे दीए भी बिक रहे हैं, जिन्हें बनाने वाले कलाकार कभी सड़कों पर भीख मांगते थे। अपने घरों से बेघर हुए यह लोग एक छत के नीचे रहकर अब घरों को रोशन करनेवाले दीये बना रहे हैं।
कलाकारी इस तरह से होती है कि आंखों को ही नहीं मन को भी छू लेता है। पटना के सरकारी शांति कुटीर पुनर्वास केन्द्र में पूजा लगभग 2 साल से रही हैं। इनका दोनों पैर एक ट्रेन हादसे में कट गया है। दर्द से कराहती स्टेशन पर पड़ी इस 15 साल की बच्ची को पहले RPF ने अस्पताल पहुंचाया, वहां से इलाज के बाद अब ये सरकारी पुनर्वास गृह में रह रही हैं।

पूजा ने ब्यूटीशन से लेकर क्ले आर्ट तक सीखा है और इन दिनों वो दीपावली के दीये और सजावटी सामान बनाने में व्यस्त है। सिर्फ पूजा ही नहीं इस आश्रय गृह में बैठी हर महिला कुछ सीखने की कोशिश कर रही हैं। ये उम्मीद लिए कि हाथों का हुनर उसके दिल, दिमाग और शरीर के जख्मों को भर देगा।
दर्द से भरीं दर्जनों कहानियां हैं इस आश्रय गृह में
आश्रय गृह में अभी करीब 60 महिलाएं और लड़कियां रह रहीं हैं। ये सभी पटना की सड़कों से रेसक्यू कर यहां लाई गई हैं। इनके सड़क पर पहुंचने की कहानी इतनी दर्द भरी है कि इसे सुनकर पत्थर दिल भी पसीज जाए। यहां रह रहीं 19 साल की अमृता के चेहरे से लेकर पेट तक का हिस्सा झुलसा हुआ है। सुनकर हैरानी होती है कि उसे ये दर्द किसी और ने नहीं, बल्कि उसकी सौतेली मां ने दिया है। सौतेली मां ने उसके चेहरे और पेट पर गर्म तेल फेंक दिया था। अमृता का परिवार आज भी गांव में है, पर वो वहां अब लौटना नहीं चाहती। नेपाल के कांठमांडू की रेखा, बंगाल में शोषण का शिकार होती रही और फिर एक दिन भाग कर पटना पहुंच गई। यहां से उसे रेस्क्यू कर आश्रय गृह लाया गया है।
पटना के विभिन्न इलाकों में बैनर लगा की जा रही दीयों और सजावटी सामान की ब्रिकी
शरीर, दिल और दिमाग पर लगे जख्मों को मिटाने की कोशिश करती इन महिलाओं ने सरकारी मदद से अब अपने लिए नई जिंदगी चुना है। ये सिर्फ दीए ही नहीं, टेराकोटा आर्ट भी बना रही हैं। लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, पूजा कलश, दीवार पर सजनेवाले आर्ट वर्क भी इन्होंने बनाया है। ये सामान पटना के बेली रोड और पाटलीपुत्रा कॉलोनी में बैनर लगाकर बेचा रहा है। सामान की ब्रिकी से जमा होने वाले पैसे बनानेवाले कलाकारों को दीये जाते हैं, जिससे वो अपने लिए कुछ अपनी मन पसंद चीजें ले सकें।



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