BIHARBreaking NewsSTATE

कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे अनसेफ, तैयार हो रहा इमरजेंसी कोविड रिस्पांस सिस्टम

कोरोना की वैक्सीन से 18 से अधिक उम्र वाले कुछ हद तक सेफ हो गए हैं लेकिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभी कोई इंतजाम नहीं है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में बिहार के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल खुली है। बच्चों के लिए तो और समस्या है क्योंकि बिहार में मासूमों के इलाज में बड़ी बाधा है। ऐसे में सरकार का पूरा जो बिहार में पीडियाट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने को लेकर है। इमरजेंसी कोविड रिस्पांस सिस्टम के तहत बिहार में 440 करोड़ के पैकेज से पीडियाट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।

कोरोना काल में खुल चुकी है सिस्टम की पोल

कोरोना काल में सिस्टम की पोल खुल चुकी है। बेड से लेकर ऑक्सीजन तक के लिए संक्रमितों को भटकना पड़ा। हालांकि सरकार का दावा है कि ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई है, लेकिन हकीकत तो उन परिवारों को पता है जो ऑक्सीजन के लिए भटकने के बाद अपने परिवार को खो दिए हैं। बिहार सरकार बच्चों के मामले में अब व्यवस्था बढ़ाने में जुटी है।

केंद्र सरकार की मदद से तैयार होगा सिस्टम

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र से बिहार में इमरजेंसी कोविड रिसपोंस पैकेज (ECRP) फेज-2 के तहत बिहार को लगभग साढ़े 13 सौ करोड़ रुपए मिलना है। इस मद में केंद्र सरकार से बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति को लगभग 860 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। ECRP फेज-2 स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ-साथ पीडियाट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर एवं रेफरल ट्रांसपोर्ट पर केंद्रित होगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत 2021 में 1116 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत हुई है।

2025 तक केंद्र बिहार को देगा 62 सौ करोड़

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 2025 तक बिहार को 62 सौ करोड़ रुपए मिलना है। इस राशि का उपयोग शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए डायग्नॉस्टिक सेवाओं को विकसित करने एवं प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं का शहरी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत करने में किया जाएगा। प्रत्येक 15 हजार शहरी आबादी पर एक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित होगा।

बिहार में गांव में भी जांच सेंटर पर जोर

बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में भी जांच सेंटरों की संख्या बढ़ाने को लेकर काम किया जा रहा है। सरकार का प्लान है कि 2025 तक बिहार के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में जांच सेंटरों की संख्या बढ़ा दी जाएगी। जिस जांच के लिए मरीजों को भागकर शहर आना पड़ता है वह 2025 तक गांव में ही हो जाएगा। इसमें खून की जांच से लेकर अन्य जांच भी शामिल होगा। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का कहना है कि बिहार में 2025 तक स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव हो जाएगा। गांव में शहर की तरह स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.