दूध और दूध उत्पादों में मिलावट के मुद्दे पर पहली बार सहकारी कंपनी तिमुल के प्लांट पर मंगलवार काे खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने धावा बाेला। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुदामा चौधरी के नेतृत्व में टीम ने करीब दाे घंटे तक पूरे प्लांट का जायजा लिया। सुधा दूध के टैंकर में मिलावट और बदबूदार लस्सी उत्पादन की खबर पर टीम ने तिमुल के प्रमुख उत्पादों का सैंपल लिया। प्रबंधन काे चेताया। कहा- मिलावट राेक कर उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित हाेनी चाहिए।
टीम ने दूध, लस्सी, पेड़ा, घी और मिल्क केक के 6 सैंपल सील कर जांच के लिए भेजा। दूध का सैंपल पटना और अन्य 4 सैंपल कोलकाता की लैब भेजे गए। जांच रिपोर्ट दाे सप्ताह में आने की उम्मीद है। लस्सी के पैकेट बैलून की तरह फूलने और दूध टैंकर में मिलावट की बाबत अधिकारी ने तिमुल प्रबंधन काे चेतावनी दी। हालांकि, तिमुल के एमडी ने गलती स्वीकार कर ली।



उन्होंने कहा कि पैकेजिंग के बाद तापमान मेंटेन नहीं रह पाने के कारण लस्सी खराब हाे गई थी। जहां से भी इसकी शिकायत मिली, वहां से लस्सी के पैकेट वापस मंगा लिए गए। उन्होंने संबंधित लाेगाें काे भरपाई राशि भी देने की बात कही। एमडी ने कहा- पहले कुछ निजी टैंकर से भी दूध आता था। मिलावट की सूचना के बाद सिर्फ तिमुल के 24 टैंकर से ही दूध मंगाया जाता है।

प्राेसेसिंग और मैन्यूफैक्चरिंग सही स्थिति में
निरीक्षण के क्रम में विभाग की टीम ने प्लांट स्थित प्रोसेसिंग और मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट के साथ लेबोरेटरी का भी जायजा लिया। हालांकि, यहां काेई गड़बड़ी नहीं मिली। टीम ने कहा- सब कुछ हाइजेनिक था।




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