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डॉक्टरों की द’रिंदगी! म’रीजों को बेड में बांध डॉक्टर-नर्स लंच पर गए, दो की मौ’त…

उत्तर प्रदेश में कानपुर के है’लट अस्पताल में डॉक्टरों और न’र्सों की अमानवीयता से दो म’रीजों की मौ’त होने की स’नसनीखेज खबर है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के है’लट अस्पताल की सर्जरी इमरजेंसी में कोमा में जा चुके तीन गं’भीर म’रीजों को बेड पर बांधकर जूनियर डॉक्टर लंच पर चले गए। सुबह 11 बजे से तीन बजे तक डॉक्टर नहीं लौटे और इस बीच दो की मौ’त हो गई।इमरजेंसी में स्टाफ नर्स भी मौजूद नहीं थी। दोपहर 3 बजे ड्यटी चेंज हुई और दूसरी स्टाफ नर्स आई तो ह’ल्ला मचा। इमरजेंसी प्रभारी डॉ. विनय कुमार ने स्टाफ नर्स से स्पष्टीकरण मांगा है। शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे स’र्जरी इमरजेंसी में तीन म’रीज भ’र्ती किए गए थे। इनमें चमनगंज निवासी शब्बीर, नजीराबाद निवासी रामदेव और एक ला’वारिस था। दो म’रीज हेड इंजरी के कारण कोमा में थे। एक म’रीज को बैंडेज के जरिए बेड में बांधा गया था, ताकि वह गि’र नहीं जाए।

रामदेव लगभग ब्रे’न डे’ड की हा’लत में था।रामदेव के परिजन किशोर कुमार का कहना है कि भ’र्ती करते वक्त दो कर्मचारी मौजूद थे। उन्होंने कुछ इंजे’क्शन दिया। कहा कि डॉक्टर साहब आ रहे हैं। कुछ देर बाद दो डॉक्टर आए तो उनसे कहा कि मरी’ज को देख लीजिए। डॉक्टरों ने कहा-अभी सीनियर आएंगे वही देखेंगे। इस बीच एक स्टाफ नर्स भी आ गई। उनसे कहा तो बोलीं-लंच के बाद डॉक्टर मिलेंगे और एक हाथ बेड में बांध दिया। इंतजार करने का भरोसा दिलाकर चली गई। किशोर का कहना है कि ला’वारिस की हालत और खराब थी। चमनगंज निवासी मरी’ज भी गं’भीर था। दोपहर बाद एक डॉक्टर आए तो बोले, यह मेरा केस नहीं है। इस बीच रामदेव की मौ’त हो गई। रामदेव को आठ जनवरी को भर्ती कराया गया था। शनिवार को उसे इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया था। कुछ देर बाद चमनगंज निवासी शब्बीर ने भी दम तो’ड़ दिया। तीन में से एक मरी’ज का हैलट में रिकार्ड में नहीं है। इमरजेंसी प्रभारी डॉ. विनय कुमार का कहना है कि जानकारी ली जा रही है। ऑन ड्यूटी स्टाफ नर्स से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

शनिवार को इमरजेंसी में डॉक्टरों के राउंड नहीं हुए
डॉक्टर महीने का दूसरा शनिवार होने के नाते अवकाश मना रहे थे। इमरजेंसी में मेडिसिन विभाग को छोड़कर कोई डॉक्टर सर्जरी या ऑर्थोपेडिक सर्जरी वार्ड में नहीं पहुंचा। एक कर्मचारी का कहना है कि राउंड नहीं होने से सभी बे’लगाम रहते हैं। इलाज पूरी तरह से जूनियर डॉक्टर के ह’वाले रहता है। स्टाफ नर्सों को भी कोई देखने वाला नहीं है। इं’जेक्शन भी ट्रेनी छात्राओं से लगवाती हैं। बेड साइड नहीं जाती हैं। इमरजेंसी में घंटे-घंटे भर म’रीज पड़े रहते हैं लेकिन उन्हें कोई देखने नहीं पहुंचता।

क्या बोले जिम्मेदार-
हैल’ट के प्रमुख अधीक्षक प्रो आरके मौर्य ने बताया कि इ’लाज के बगैर म’रीजों की मौ’त होना ग’म्भीर घ’टना है। किसी तरह की शि’कायत नहीं मिली है और न ही इमरजेंसी प्रभारी की ओर से किसी तरह की सूचना दी गई है। रविवार को घटना की पड़ताल कराएंगे। देखा जाएगा कि ऑन कॉल डॉक्टर ने देखा है या नहीं ? तभी स्थिति स्पष्ट होगी।

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