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बिहार पुलिस का 10 साल पुराना डाटा होगा डिजिटल, एक क्लिक में स्क्रीन पर आ जाएगा अप’राध और अप’राधियों का रिकॉर्ड

बिहार पुलिस 10 साल के डेटा को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने में जुटी है। अपराध और अपराधियाें का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल होते ही पुलिस कर्मियों को मोटे मोटे रजिस्टर को पलटने से मुक्ति मिल जाएगी, बस एक क्लिक पर कम्प्यूटर स्क्रीन पर अपराध और अपराधियों का पूरा डेटा कम्प्यूटर स्क्रीन पर आ जाएगा। बिहार पुलिस मुख्यालय का कहना है कि CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) योजना के तहत थानों को डिजिटलाइजेशन करने का काम तेजी से चल रहा है।

894 थानों में CCTNS का काम पूरा

बिहार पुलिस मुख्यालय का कहना है कि CCTNS परियोजना के तहत बिहार के 894 थानों का काम पूरा कर लिया गया है। बिहार पुलिस मुख्यालय का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश में शेष कुल 202 थानों को भी CCTNS परियोजना में 2019-20 में शामिल किया गया है। दूसरे चरण में लंबित 202 कार्यालयों में इसका काम किया जाएगा। बिहार पुलिस का कहना है कि लगभग 2000 सिपाहियों जिसमें महिला कांस्टेबल भी शामिल हैं को प्रशिक्षित कर उनसे थानों में CCTNS का काम कराया जा रहा है।

FIR और केस डायरी सब डिजिटल

बिहार पुलिस मुख्यालय का कहना है कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम CCTNS के तहत न्यायालयों के साथ इंवेस्टीगेशन किया जा चुका है। एफआईआर, केस डायरी और सीएस सीधे डिजिटल मोड पर न्यायालय में भेजे जाते हैं। बिहार पुलिस मुख्यालय का कहना है कि राज्य के सभी जिलों में पिछले 10 साल के पुलिस रिकॉर्ड को डिजिटलाइजेशन काम तेजी से किया जा रहा है। इससे बिहार पुलिस पूरी तरह से डिजिटल मोड पर हो जाएगी। कागजातों को खोजना और अपराध व अपराधियों का मिलान करना भी आसान होगा।

दिसंबर तक काम पूरा होने में बाधा

बिहार पुलिस का दावा है कि दिसंबर तक राज्य के सभी थानों में CCTNS का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद बिहार के सभी थाना ऑनलाइन हो जाएंगे। लेकिन बिहार पुलिस के इस दावे के इतर इस काम में अभी कई बड़ा रोड़ा है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में आज भी ऐसे थाने हें जहां पुलिस को मोबाइल नेटवर्क के लिए जूझना पड़ता है। बिजली के लिए भी पुलिस कर्मियों को मशक्कत करनी पड़ती है। बिहार के ऐसे थानों को डिजिटल बनाने का सपना है जहां आज मोबाइल नेटवर्क के लिए जवानों को तरसना पड़ता है। क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम के तहत देश के सभी थानों को डिजिटल करना है और केंद्र सरकार की इस योजना में बिहार काफी पीछे चल रहा है।

पुलिस को CCTNS से फायदा

  • मैनुअल काम में होगी काफी कमी
  • डुप्लीकेट काम को लेकर कोई जरूरत नहीं होगी।
  • थाना के रजिस्टर डिजिटल साफ्टवेयर पर होते रहेंगे तैयार।
  • कोई भी रिपोर्ट तत्काल निकाली जा सकेगी।
  • देश के किसी भी क्षेत्र के अपराध और अपराधी के बारे में किसी थाना से जानकारी मिल जाएगी।
  • अपराध की मॉनिटरिंग में आएगी तेजी और पुलिस का काम होगा आसान।
  • थाना की विवेचना और अफसरों की मॉनिटरिंग के लिए भी नहीं जाना होगा संबंधित थाना।
  • पुलिस के काम में आएगी पारदर्शिता, पब्लिक को भी नहीं होना होगा परेशान।
  • पुलिस किसी भी मामले में हेरफेर नहीं कर पाएगी।
  • आम-जनता काे भी होगा काफी फायदा, पुलिस की मनमानी से नहीं होंगे परेशान।
  • घर से ही शिकायत दर्ज करने की मिल जाएगी सुविधा।
  • घर बैठे ही पुलिस को अपराध और अपराधियों के बारे में गोपनीय सूचना दे सकेंगे।
  • चरित्र सत्यापन के साथ कर्मचारियों के सत्यापन का काम भी आम जनता के लिए होगा आसान।
  • शस्त्र लाइसेंस आदि का आवेदन भी करना आसान होगा और उसकी प्रगति घर बैठे जान सकेंगे।

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